सूरजपुर : सेवा सेतु बना सुशासन की डिजिटल पहचान, 441 सेवाएं एक मंच पर उपलब्ध
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रशासनिक सेवाएं पहुंचीं नागरिकों की उंगलियों तक सूरजपुर, 21 जून (हि.स.)। शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘सेवा सेतु’ सुशासन का
सेवा सेतु पोर्टल


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रशासनिक सेवाएं पहुंचीं नागरिकों की उंगलियों तक

सूरजपुर, 21 जून (हि.स.)। शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘सेवा सेतु’ सुशासन का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को आम नागरिकों तक सरल, सुगम और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक्शा जैसी 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

डिजिटल युग में सुशासन की अवधारणा को मजबूत करते हुए सेवा सेतु ने नागरिक सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाया है। पहले जहां सामान्य प्रमाण-पत्रों और अन्य शासकीय कार्यों के लिए लोगों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब नागरिक घर बैठे या निकटतम लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

राज्य सरकार ने तकनीकी उन्नयन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहां केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं उन्नत सेवा सेतु प्लेटफॉर्म पर 441 सेवाएं संचालित की जा रही हैं। पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एकीकृत किया गया है। इसके तहत 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं को भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टलों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सेवा सेतु ने और अधिक प्रभावी बनाया है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो सिस्टम के माध्यम से प्रत्येक आवेदन की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनावश्यक विलंब की संभावनाएं कम हुई हैं।

सेवा सेतु केवल एक डिजिटल पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। शासन का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक प्रक्रियाएं और अधिक सरल, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी हुई हैं तथा भविष्य में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय