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सूरजपुर, 21 जून (हि.स.)। आज रविवार को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत पात्र भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। योजना का उद्देश्य भूमिहीन परिवारों की आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
योजना के अंतर्गत ऐसे परिवारों को लाभ दिया जा रहा है, जो कृषि कार्यों में श्रम करते हैं, लेकिन उनके पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है। शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग लाभार्थी परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों की पूर्ति के लिए कर सकते हैं। इससे न केवल परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
योजना के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना आवश्यक है। पात्र हितग्राहियों में भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अलावा चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी तथा अनुसूचित क्षेत्रों में देवस्थलों से जुड़े पुजारी, वैद्य, गुनिया और मांझी परिवार भी शामिल हैं।
आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इच्छुक हितग्राही ग्राम पंचायत या नगर पंचायत कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाएगी। हितग्राही अपने पंजीयन की स्थिति मोबाइल नंबर, आधार नंबर अथवा पंजीयन क्रमांक के माध्यम से ऑनलाइन भी देख सकते हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि नियमित वित्तीय सहायता से भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को स्थायी आर्थिक संबल मिलेगा और समाज के कमजोर वर्गों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय