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नई दिल्ली, 21 जून (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने खालिस्तानी और गैंगस्टर तत्वों के नाम पर एक रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी के मालिक से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने कारोबारी को जान से मारने की धमकी देने के लिए फर्जी खालिस्तानी और गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल किया था।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (एआरएससी) ने इस मामले में पंजाब के तरनतारन और अमृतसर से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान तरनतारन निवासी गुरपिंदर सिंह उर्फ प्रिंस (32), शमशेर सिंह उर्फ सैम (35) और अमृतसर निवासी जसवंत सिंह (59) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह मामला चाणक्यपुरी थाने में 17 अक्टूबर 2025 को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता साहिल लूथरा ने पुलिस को बताया था कि उन्हें गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और खालिस्तानी तत्वों के नाम पर 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाले कई फोन कॉल और धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं। साहिल लूथरा रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनी विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (वीटीडीएस) के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं।
व्हाट्सएप वॉइस नोट से दी थी धमकी
पुलिस के मुताबिक, अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान शिकायतकर्ता को कई धमकी भरे कॉल और संदेश मिले। इसके बाद चार जून 2026 को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हाट्सएप वॉइस नोट भेजकर 10 करोड़ रुपये की मांग की गई। वॉइस नोट में रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। मामले की जांच 10 जून 2026 को क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और व्हाट्सएप समेत विभिन्न सेवा प्रदाताओं से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की।
कंपनी का पूर्व अधिकारी निकला साजिश का मास्टरमाइंड
पूछताछ में गुरपिंदर सिंह और शमशेर सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने जसवंत सिंह के कहने पर धमकी भरे वॉइस नोट और संदेश शिकायतकर्ता को भेजे थे। जांच में सामने आया कि जसवंत सिंह शिकायतकर्ता की कंपनी के पंजाब संचालन की जिम्मेदारी संभालता था। पुलिस का दावा है कि इससे पहले भेजे गए धमकी भरे कॉल और संदेश भी स्पेन में बैठे 'मन्नी' नामक व्यक्ति के जरिए जसवंत सिंह की मिलीभगत से कराए गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित पंजाब में शिकायतकर्ता पर हुई फायरिंग की घटना में भी शामिल रहे हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है और दोनों मामलों के बीच कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपित जसवंत सिंह पंजाब पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के पद पर तैनात था, लेकिन वर्ष 2006 में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उसके खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्ष 2008 में उसके खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा वर्ष 2019 में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में भी उसका नाम सामने आया था। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए गए पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस अब इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी