बिहान ने बदली तकदीर - संघर्ष से सफलता तक सावित्री बिस्वास की प्रेरक उड़ान
कोरबा, 21 जून (हि. स.)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक
बिहान ने बदली तकदीर - संघर्ष से सफलता तक सावित्री बिस्वास की प्रेरक उड़ान


कोरबा, 21 जून (हि. स.)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका परिणाम है कि अनेक महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

विकासखंड कोरबा के ग्राम पंचायत गुरमा की निवासी श्रीमती सावित्री बिस्वास ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से निकलकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है। सीमित आय और आजीविका के सीमित साधनों के बीच जीवनयापन कर रहीं सावित्री बिस्वास ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी। बिहान योजना के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, उद्यम विकास, समूह प्रबंधन और आजीविका संवर्धन संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उनमें आत्मविश्वास और व्यवसायिक समझ विकसित हुई।

जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उनके समूह को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए उन्होंने लगभग 60 हजार रुपये की पूंजी से किराना और फैंसी स्टोर की शुरुआत की। व्यवसाय में सफलता मिलने पर उन्होंने एक लाख रुपये के निवेश से चप्पल दुकान शुरू की। बाद में सीएलएफ से दो लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि सेवा केंद्र स्थापित किया तथा बैंक और सीएलएफ से लगभग छह लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर मेडिकल स्टोर एवं कृषि सेवा केंद्र का विस्तार किया।

आज सावित्री बिस्वास फैंसी स्टोर, कपड़ा दुकान, चप्पल दुकान, राशन दुकान, बर्तन दुकान, मेडिकल स्टोर और कृषि सेवा केंद्र सहित विभिन्न व्यवसायों का सफल संचालन कर रही हैं। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है कि उनकी वार्षिक आय लगभग 7 लाख 70 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

आर्थिक प्रगति का असर उनके परिवार के जीवन स्तर पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। उनका एक पुत्र बी. फार्मेसी की पढ़ाई कर रहा है, पुत्री बीएससी नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है, जबकि छोटा पुत्र चॉइस सेंटर का संचालन कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है।

सावित्री बिस्वास की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने, नियमित बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी प्रेरणा से अनेक महिलाएं किराना, कपड़ा, चप्पल व्यवसाय और होटल संचालन जैसे कार्यों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।

सावित्री बिस्वास का मानना है कि, यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन कोरबा को देती हैं, जिनके सहयोग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उनकी कहानी यह साबित करती है कि संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में परिवर्तन की नई मिसाल भी स्थापित कर सकती हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी