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वाराणसी, 20 जून (हि.स.)। निग्रहाचार्य स्वामी भागवतानंद जी महाराज ने पराड़कर भवन में आयोजित अभिनन्दन समारोह में शनिवार काे कहा कि ब्राह्मण धर्म के प्रति नतमस्तक हूँ, और सनातन धर्म का प्रचार करने के लिए कुख्यात हूँ। विद्वत समाज का आभारी हूं जो इस सनातन धर्म के विद्यार्धी का सम्मान किया। कर्तव्य विहीन व्यक्ति कभी मुक्त नहीं होता। काशी में तो महादेव ही सबको कर्तव्य सिखाते हैं और मुक्त भी करते हैं।
काशी विद्वत परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मैं किसी सभा में नहीं जाता, लेकिन काशी विद्वत सभा में बैठना ही मेरा कद बढ़ा देता है। काशी एक ऐसा शहर है, जहां ऐश्वर्य और वैराग्य दोनों है। निग्रहाचार्य उपाधि है, जैसे शंकराचार्य एक उपाधि है। मठ, गुरुकुल के आचार्य योग्य नहीं हो रहे हैं, जबकि उन्हें होना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद