मदस विश्वविद्यालय स्वदेशी कन्सोर्टियम स्थापित करने वाला राजस्थान का पहला विश्वविद्यालय बना
अजमेर, 13 जून(हि.स.)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने शिक्षा, उद्योग, नवाचार एवं स्वदेशी उद्यमिता के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल करते हुए “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” की स्थापना की है। यह कंसोर्टियम
MDU became the first university in Rajasthan to establish an indigenous consortium.


अजमेर, 13 जून(हि.स.)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने शिक्षा, उद्योग, नवाचार एवं स्वदेशी उद्यमिता के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल करते हुए “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” की स्थापना की है। यह कंसोर्टियम मदस विश्वविद्यालय द्वारा चार्ज के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को व्यवहारिक औद्योगिक शिक्षा, स्वदेशी नवाचार, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भर उद्यमिता से जोड़ना है।

साथ ही विश्वविद्यालय ने प्रख्यात उद्यमी, नवाचार विशेषज्ञ एवं एग्रो-इंडस्ट्रियल क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्व डॉ. राधेश्याम चोयल को “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (मानद)” नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच मजबूत सेतु निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” का उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग एवं उद्यमिता के मध्य सशक्त समन्वय स्थापित करना है, ताकि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक औद्योगिक अनुभव एवं उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सके। यह कंसोर्टियम विशेष रूप से कृषि-आधारित उद्योगों, एग्रो-प्रोसेसिंग, ग्रामीण नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, एफपीओएस तथा स्वदेशी उत्पादन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देगा। कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय सदैव शिक्षा को समाज, उद्योग एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें नवाचार, कौशल विकास एवं रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित होना होगा।

डॉ. राधेश्याम चोयल ने पिछले 34 वर्षों से उद्यमिता एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। उन्होंने 26 वर्षों तक अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए कई व्यवहारिक औद्योगिक मॉडल विकसित किए हैं। कृषि-औद्योगिक क्षेत्र एवं एग्रो-प्रोसेसिंग सेक्टर में उनका अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। बीते एक दशक में उन्होंने हजारों युवाओं, किसानों एवं उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान कर स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया है।

डॉ. राधेश्याम चोयल ने अपनी नियुक्ति पर विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत एवं स्वदेशी उद्योग की अवधारणा तभी सशक्त होगी जब युवाओं को व्यवहारिक कौशल, नवाचार एवं उद्यमिता से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कंसोर्टियम आने वाले समय में युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रनिर्माण के लिए सक्षम बनाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष