बलरामपुर : आधुनिक खेती ने बदली लतिका की तकदीर, बनीं ‘लखपति दीदी’
बलरामपुर, 13 जून (हि.स.)। शनिवार को महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई, जहां स्व-सहायता समूह से जुड़कर एक ग्रामीण महिला ने आधुनिक खेती के दम पर अपनी आर्थिक स्थिति बदल दी। जिले के राधाकृष्णनगर की निवासी लतिका सिदार आ
लाभार्थी महिला।


बलरामपुर, 13 जून (हि.स.)। शनिवार को महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई, जहां स्व-सहायता समूह से जुड़कर एक ग्रामीण महिला ने आधुनिक खेती के दम पर अपनी आर्थिक स्थिति बदल दी। जिले के राधाकृष्णनगर की निवासी लतिका सिदार आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

लतिका सिदार की सफलता की शुरुआत राधाकृष्ण स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद हुई। समूह के माध्यम से उन्हें सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों, आजीविका संवर्धन और उद्यमिता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

प्रशिक्षण से मिली सीख को उन्होंने व्यवहार में उतारते हुए अपनी एक एकड़ कृषि भूमि में ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और उन्नत बागवानी तकनीकों का उपयोग शुरू किया। खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली और मल्चिंग की व्यवस्था की।

इन आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आया। मिर्च, बरबट्टी सहित अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ा, सिंचाई के लिए पानी की बचत हुई और खेती की लागत में भी कमी आई। बेहतर उत्पादन और बढ़ी हुई उपज ने उनकी आमदनी को नई ऊंचाई दी।

आज लतिका की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। कृषि और अन्य आजीविका गतिविधियों से होने वाली इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। अब वे न केवल परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी कर रही हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए भी निवेश कर रही हैं।

लतिका सिदार बताती हैं कि स्व-सहायता समूह ने उन्हें आत्मविश्वास, अवसर और आगे बढ़ने का मंच दिया। उनका कहना है कि भविष्य में वे अपनी खेती को पूरी तरह जैविक स्वरूप देना चाहती हैं, ताकि बेहतर उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकें।

जिले में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनते हुए स्वरोजगार के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। लतिका सिदार की सफलता इसी बदलाव की एक मिसाल है, जो दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिख सकती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय