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चतरा, 13 जून (हि.स.)। तालाब की खुदाई के क्रम में 1200 साल प्राचीन प्रतिमा और पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। प्रतिमा के निकलने से ग्रामीण उत्साहित हैं और इसकी विधिवत पूजा अर्चना कर रहे हैं। चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड के करनी गांव में शनिवार को बामणी तालाब से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। जेसीबी और ट्रैक्टर से मिट्टी को काटकर भराई के लिए जा रहा था। इसी बीच जेसीबी के चालक विकास कुमार दांगी की नजर एक काले प्रतिमा पर पड़ी। गांव के श्रवण कुमार वर्मा ने बताया कि जेसीबी से तालाब से मिट्टी निकाला जा रहा था। 02 से 03 फीट नीचे खुदाई के क्रम में ढाई से तीन फीट ऊंची काले पत्थर से बनी एक प्रतिमा और एक नक्काशी किया हुआ पत्थर निकला। प्रतिमा निकलने की खबर सुनकर आसपास के गांव से काफी संख्या में लोग यहां पहुंचे और प्रतिमा की सफाई के बाद पेड़ के नीचे रख कर पूजा अर्चना करने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आहर से प्रतिमा निकलना किसी चमत्कार से काम नहीं है।
प्रतिमा की पहचान उमा महेश्वरी की प्रतिमा के रूप में की गई है। पुरातत्वविद डॉ उदेश कुमार ने बताया कि प्रतिमा पालकालीन है जो 9वीं से 12वीं शताब्दी की प्रतीत हो रही है। उन्होंने बताया कि उमा महेश्वर की यह कलात्मक मूर्ति आलिंगन मुद्रा में है। शिवजी के पैर के नीचे नंदी और माता पार्वती के पैर के नीचे शेर का चित्र अंकित है। यह शिव और पार्वती के प्रेम मिलन और पारिवारिक स्वरूप को दर्शाता है।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेरिटेज, नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर और चतरा में कई शोध और उत्खनन का हिस्सा रहे डॉ ललित कुमार ने बताया कि चतरा जिले के इटखोरी के आसपास ऐसी कई प्रतिमाएं मिली हैं जो काफी प्राचीन है।
प्राचीन भद्राकाली मंदिर के गर्भ गृह के बाहर भी ऐसी प्रतिमाएं लगी हुई हैं। ऐतिहासिक बिहारी स्थान में भी ऐसी प्रतिमाएं देखी गई हैं। इटखोरी से लेकर मयूरहड के बीच 12 से 15 उमा महेश्वर की प्रतिमाएं पुरातत्व विभाग ने चिन्हित की है। उन्होंने कहा कि इटखोरी और आसपास प्राचीन सभ्यताएं रही हैं। पाल काल के कई धरोहर और अवशेष यहां देखे गए हैं।
प्रतिमा मिलने की सूचना मिलते ही करनी और आसपास के गांव से यहां काफी संख्या में लोग पहुंचे। महिलाएं प्रतिमा को साफ कर पीपल के पेड़ के नीचे रखकर विधिवत पूजा अर्चना शुरू कर दी है। लोगों ने बताया कि इस स्थान में अब मंदिर का निर्माण कर प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेन्द्र तिवारी