बलरामपुर : चेकडेम से बदली खेती की तस्वीर, किसानों को मिलेगा दोहरी फसल का लाभ
बलरामपुर, 13 जून (हि.स.)। शनिवार को जिले में जल संरक्षण और कृषि विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया। कभी केवल बारिश के भरोसे खेती करने वाले ग्राम सुलसुली के किसानों के लिए अब सिंचाई की स्थायी व्यवस्था उपलब्ध हो गई है
चेकडैम


बलरामपुर, 13 जून (हि.स.)। शनिवार को जिले में जल संरक्षण और कृषि विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया। कभी केवल बारिश के भरोसे खेती करने वाले ग्राम सुलसुली के किसानों के लिए अब सिंचाई की स्थायी व्यवस्था उपलब्ध हो गई है। मनरेगा के तहत लेदो नाला पर निर्मित चेकडेम किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिससे न केवल सिंचाई सुविधा बढ़ेगी बल्कि दोहरी फसल लेने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत सुलसुली के लेदो नाला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 17 लाख रुपये की लागत से चेकडेम का निर्माण कराया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है।

ग्रामीणों के अनुसार, सिंचाई संसाधनों के अभाव में यहां के किसान लंबे समय से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे। पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण अधिकांश किसान केवल खरीफ फसल ही ले पाते थे, जबकि रबी सीजन में बड़ी मात्रा में कृषि भूमि खाली पड़ी रहती थी।

लेदो नाला पर बने चेकडेम ने इस स्थिति को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसके माध्यम से लगभग 10 किसानों की 15 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। इससे दोहरे फसल चक्र को बढ़ावा मिलेगा, खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार चेकडेम निर्माण का लाभ केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। इससे क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा और आसपास के कुओं एवं अन्य जलस्रोतों में भी जल उपलब्धता बढ़ेगी। परिणामस्वरूप किसानों को लंबे समय तक कृषि कार्यों के लिए पानी मिलता रहेगा और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जी, दलहन, तिलहन और अन्य लाभकारी फसलों की खेती भी कर सकेंगे। इससे कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

यह चेकडेम ग्रामीणों के दैनिक जीवन में भी उपयोगी साबित होगा। संरक्षित जल का उपयोग घरेलू कार्यों, निस्तार, नहाने-धोने तथा पशुओं के पेयजल के रूप में किया जा सकेगा। इससे गांव में जल संकट की समस्या कम होने के साथ-साथ लोगों की जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

मनरेगा के तहत निर्मित यह चेकडेम जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और कृषि विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। यह परियोजना ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने, जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय