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उदयपुर, 13 जून (हि.स.)। उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र में सामने आए सामूहिक धर्मांतरण प्रकरण में गिरफ्तार 11 आरोपिताें को बड़ा झटका देते हुए खेरवाड़ा के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। शनिवार को पीठासीन अधिकारी जगदीश कुन्तल ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
मामला कानूवाड़ा बिलखाई गांव का है, जहां 6 जून 2026 को पुलिस ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन करवाने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। बिलखाई निवासी नानालाल ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसे ईशा भगवान की प्रार्थना सभा में बुलाया गया, जहां पहले से 150 से 200 लोग मौजूद थे। आरोपिताें द्वारा उसे ईसाई धर्म अपनाने पर बीमारी ठीक करने, घर पर नया कुआं और हैंडपंप खुदवाने जैसे प्रलोभन दिए गए। विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।
पुलिस ने राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2025 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की थी। सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने उन्हें आपसी विवाद में फंसाए जाने का तर्क दिया, जबकि परिवादी पक्ष ने कहा कि बिना अनुमति सार्वजनिक स्थल पर लाउडस्पीकर लगाकर सभा आयोजित की गई तथा गरीब और आदिवासी वर्ग के लोगों को चमत्कार और आर्थिक लाभ का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। पुलिस को मौके से ईसाई धर्म संबंधी 17 पुस्तकें, सीडी और अन्य सामग्री भी मिली।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारत में प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन किसी व्यक्ति को प्रलोभन, दबाव या अपमान के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य करना स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने इसे देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा बताया।
चूंकि पीड़ित अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग से संबंधित है और सभा में नाबालिग बच्चों की उपस्थिति भी सामने आई है, इसलिए मामले की गंभीरता और संभावित साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए कोर्ट ने सभी आरोपिताें की जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता