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जयपुर, 12 जून (हि.स.)। जयपुर जिले के सेशन न्यायालय ने गलता थाना गेट इलाके में जनवरी 2018 में हुए एक व्यक्ति तेजप्रकाश शर्मा की हत्या के मामले में अपराध साबित नहीं होने पर आरोपित पत्नी सीमा व साले श्रीकान्त निर्मोही उर्फ छोटा सहित अन्य आरोपित किराएदार अभिषेक शर्मा को संदेह का लाभ में दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी की घोर लापरवाही, विरोधाभासी कागजी कार्रवाई और साक्ष्यों के अभाव के चलते आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित नहीं हो सका है।
डीजे माधवी दिनकर ने फैसले में कहा कि मृतक के भाई हरीश शर्मा ने कंकाल देखने के बाद उसके भाई का होने से मना कर दिया और कहा कि वह अपने भाई के कपड़ों को भी नहीं पहचानता। वह आज भी नहीं मानता की उसके भाई की हत्या की है। वहीं मामले की कड़ियां आपस में पूरी तरह से नहीं जुड़ रही हैं। न्यायालय ने जांच अधिकारी और पुलिस टीम की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की थ्योरी में समय और दूरी का जो गणित पेश किया गया है वह पूरी तरह से काल्पनिक और असंभव प्रतीत होता है। कोर्ट ने माना कि परिस्थितियों पर आधारित मामले में केवल संदेह या आधे-अधूरे विरोधाभासी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में आरोपियों को संदेहलाभ में दोषमुक्त करना उचित होगा।
मामले के अनुसार हरीश कुमार शर्मा ने गलता गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनका 40 साल का छोटा भाई 14 जनवरी 2018 को घर से कटिंग करवाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वापस नहीं आया। वहीं 26 जनवरी को जलमहल की पहाड़ियों में एक नरमुंड व हड्डियां बरामद हुईं। पुलिस ने दावा किया कि मृतक की पत्नी सीमा शर्मा, उसके साले श्रीकान्त निर्मोही उर्फ छोटा और किराएदार अभिषेक शर्मा ने मिलकर तेज प्रकाश की गला घोंटकर और पत्थरों से कुचलकर हत्या की है। ट्रायल के दौरान मामले में अभियोजन पक्ष ने 27 से ज्यादा गवाह और दर्जनों दस्तावेज पेश किए गए। अभियाेजन की कहानी थी कि आरोपित सीमा और किराएदार अभिषेक के बीच नाजायज संबंधों के चलते तेजप्रकाश की हत्या हुई है, लेकिन मृतक के सगे भाइयों और रिश्तेदारों ने कोर्ट में ऐसी किसी भी जानकारी या रंजिश होने से मना कर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक