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रामगढ़, 11 जून (हि.स.)। जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर गुरुवार को राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में विशेष व्याख्यान माला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को समझने का प्रयास किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों, पदाधिकारियों और विद्यार्थियों ने धरती आबा को श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बीएन साह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन संघर्ष, साहस और नेतृत्व का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना आज भी युवाओं को प्रेरित करती है।
विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों से परिचित कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वहीं कुलपति प्रो (डॉ) रश्मि ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान योद्धाओं में शामिल थे, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशक्त संघर्ष किया और जनजातीय समाज को संगठित करने का कार्य किया।
कुलसचिव प्रो (डॉ) निर्मल कुमार मंडल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का योगदान भारतीय इतिहास में सदैव अमिट रहेगा। उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ पूनम ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक जनजातीय नायक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक पहचान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक थे।
व्याख्यान माला के दौरान विद्यार्थियों को भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके सामाजिक सुधार आंदोलनों, जनजातीय अधिकारों की रक्षा तथा स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश