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चंडीगढ़, 06 मई (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन, कन्यादान सहायता और एफएफ प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
मुख्य सचिव कार्यालय के सामान्य प्रशासन विभाग (प्रोटोकॉल-1 शाखा) की ओर से जारी नए आदेशों में साफ कर दिया गया है कि अब बिना स्पष्ट जांच और सिफारिश के कोई मामला आगे नहीं भेजा जाएगा। सरकार ने यह फैसला उस स्थिति को देखते हुए लिया है, जिसमें कई जिलों से केवल अधीनस्थ अधिकारियों की रिपोर्ट को आगे भेज दिया जाता था, लेकिन पात्रता को लेकर कोई स्पष्ट प्रमाणन या अनुशंसा नहीं दी जाती थी। अब सरकार ने मंडलायुक्तों व जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक केस तय प्रारूप में ही भेजा जाए और उसमें पात्रता की स्पष्ट पुष्टि अनिवार्य होगी।
सरकार द्वारा जारी नए फॉर्मेट के अनुसार अब आवेदन प्रक्रिया को तीन स्तरों में बांटा गया है। पहले चरण में पटवारी, कानूनगो या क्लर्क द्वारा आवेदक के रिकॉर्ड, पृष्ठभूमि और पात्रता की जांच की जाएगी। दूसरे चरण में तहसीलदार, नायब तहसीलदार या नोडल अधिकारी केस की पुष्टि करते हुए अपनी सिफारिश देंगे। इसके बाद एसडीएम स्तर पर विस्तृत अनुशंसा की जाएगी। अंतिम स्वीकृति के लिए मामला उपायुक्त कार्यालय भेजा जाएगा, जहां से स्पष्ट सिफारिश के साथ सरकार को भेजा जाएगा।
आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड संलग्न करना जरूरी होगा। बिना संपूर्ण जांच और प्रमाणन के कोई भी फाइल स्वीकार नहीं की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा