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मंडी, 06 मई (हि.स.)। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने बुधवार को सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के द्वितीय दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। इस समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने इसे मात्र डिग्री वितरण कार्यक्रम न बताते हुए ज्ञान, संस्कृति और जिम्मेदारी के संगम का उत्सव बताया। उन्होंने स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल व्यक्तिगत करियर तक सीमित न रहें बल्कि अपने ज्ञान, नवाचार और नैतिक मूल्यों को ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में समर्पित करें।
उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का उनका आदर्श आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता के समय था। विश्वविद्यालय परिसर में सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय की सराहना करते हुए उन्होंने भारत वल्लभ की अवधारणा को राष्ट्रीय दृष्टि का प्रतीक बताया।
राज्यपाल ने छात्रों से एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की कम समय में हुई उल्लेखनीय प्रगति की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चरणबद्ध क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की स्थापना, पहले दीक्षांत समारोह का पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में आयोजन तथा विभिन्न शैक्षणिक समितियों के गठन को सराहनीय कदम बताया।
राज्यपाल ने छात्रों से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने, नशामुक्त जीवन अपनाने, पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने का आग्रह किया।
दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के 575 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि 40 छात्रों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने वर्ष 2022 में स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने 2.30 करोड़ रुपये की शोध परियोजनाएं प्राप्त कीं, 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए तथा दो पेटेंट के लिए स्वीकृति हासिल की। उन्होंने कहा कि विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ 22 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने बहुविषयक शिक्षा, कौशल आधारित पाठ्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट प्रणाली और बहु-प्रवेश एवं निकास व्यवस्था को लागू किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा