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बरेली, 6 मई (हि.स.)। प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर उपभोक्ताओं का बढ़ता गुस्सा आखिरकार बिजली विभाग पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। जिले में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया गया है, जबकि पहले से जुड़े कनेक्शनों को दोबारा पोस्टपेड सिस्टम में लाने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक आदेश का इंतजार है, लेकिन विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। हालांकि ऊर्जा मंत्री ने मीडिया में बयान जारी कर दिया है कि सभी प्रीपेड स्मार्ट मीटराें काे पाेस्टपेड की तरह प्रयाेग माना जाएगा।
करीब छह महीने पहले शुरू हुई इस योजना को बिजली व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग रही। बैलेंस खत्म होते ही बिना किसी मोहलत के बिजली कट जाने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मामलों में रात के समय अचानक बिजली गुल होने से लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।
उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मीटर तेज चल रहे हैं, जिससे पहले के मुकाबले ज्यादा बिल आ रहा है। कर्मचारियों और पेंशनर्स ने भी इस व्यवस्था का विरोध किया। बावजूद इसके, विभाग ने लंबे समय तक शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे असंतोष बढ़ता गया। जिले में करीब 1.30 लाख उपभोक्ता इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं।
लगातार विरोध और शिकायतों के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा। सूत्रों के मुताबिक, उच्च स्तर से फिलहाल इस व्यवस्था पर रोक के संकेत मिले हैं। इसके साथ ही पोस्टपेड प्रणाली में वापसी को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है।
उधर, विभाग ने उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए मई माह में विभिन्न तिथियों पर मेगा कैंप आयोजित करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा, ताकि बिजली व्यवस्था को वास्तव में उपभोक्ता हितैषी बनाया जा सके।
मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि प्रीपेड मीटर लगाने को लेकर फ़िलहाल शासन स्तर से रोक लगाई गई है अग्रिम आदेशों तक कोई भी प्रक्रिया विभाग द्वारा नहीं की जा रही है, वहीं प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड मे कराने को लेकर कार्रवाई जारी है उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान कराने में विभाग जुटा हुआ हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार