पेस्टिसाइड रेजिड्यू लेबोरेट्री को मिली एनएबीएल मान्यता, किसानों व आमजन को मिलेगा बड़ा लाभ
जयपुर, 06 मई (हि.स.)। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (रारी), दुर्गापुरा स्थित पेस्टिसाइड रेजिड्यू लेबोरेट्री को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड की प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त हुई है, जो वर्ष 2030 तक प्रभावी रहेगी। यह उपलब
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जयपुर, 06 मई (हि.स.)। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (रारी), दुर्गापुरा स्थित पेस्टिसाइड रेजिड्यू लेबोरेट्री को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड की प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त हुई है, जो वर्ष 2030 तक प्रभावी रहेगी। यह उपलब्धि संस्थान की वैज्ञानिक क्षमता एवं गुणवत्ता के उच्च मानकों का प्रमाण है।

हाल ही में एनएबीएल की विशेषज्ञ टीम द्वारा प्रयोगशाला का विस्तृत निरीक्षण एवं तकनीकी मूल्यांकन किया गया, जिसमें कार्यप्रणाली, उपकरणों की गुणवत्ता, परीक्षण विधियों, मानव संसाधन की दक्षता एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली का गहन परीक्षण किया गया। मूल्यांकन में प्रयोगशाला को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एवं विश्वसनीय पाया गया, जिसके आधार पर यह मान्यता प्रदान की गई।

रारी निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह मनोहर ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह संस्थान के वैज्ञानिकों एवं पूरी टीम के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह प्रयोगशाला प्रदेश में कृषि क्षेत्र की अग्रणी एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में शामिल है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में भी इस प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में फल, सब्जियां, अनाज एवं अन्य खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की जांच की जाती है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनएबीएल मान्यता मिलने से परीक्षण रिपोर्ट की विश्वसनीयता एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता और बढ़ेगी।

इस मान्यता से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। अब किसान अपने उत्पादों की गुणवत्ता परीक्षण करवाकर बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, कृषि उत्पादों के निर्यात में भी यह मान्यता सहायक सिद्ध होगी।

नेटवर्क कॉर्डिनेटर डॉ. वंदना त्रिपाठी ने बताया कि भविष्य में प्रयोगशाला को और आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों से सुसज्जित करने के प्रयास किए जाएंगे।

श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु प्रो. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि सुविधा विशेष रूप से जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए लाभकारी होगी, जिन्हें अब प्रमाणन के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश