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धर्मशाला, 06 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे कमाई का अड्डा करार दिया है। डॉ. पुंडीर ने कहा कि बोर्ड पिछले तीन वर्षों से लगातार विभिन्न शुल्कों में वृद्धि कर बच्चों और उनके अभिभावकों पर अनुचित आर्थिक बोझ डाल रहा है।
बुधवार को जारी एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि पुनर्मूल्यांकन के लिए 1000 रुपये और री-चेकिंग के लिए 800 रुपये प्रति विषय का शुल्क गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों के साथ अन्याय है। बोर्ड को इसे तुरंत कम करना चाहिए। डॉ. पुंडीर ने प्रदेश सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है ताकि शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जा सके। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2024 की परीक्षा संचालन और मूल्यांकन कार्य में लगे हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को अभी तक उनका मेहनतनामा (मानदेय) नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बोर्ड एक तरफ छात्रों से भारी भरकम वसूली कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों का वाजिब पैसा दबाए बैठा है। बोर्ड प्रशासन को अविलंब बजट जारी कर शिक्षकों का भुगतान करना चाहिए।
डॉ. पुंडीर ने चेतावनी दी है कि यदि बोर्ड ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और शिक्षकों का मानदेय जल्द जारी नहीं किया, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया