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सांबा, 06 मई (हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज घगवाल स्थित प्राचीन श्री नरसिंह देव मंदिर में श्री नरसिंह देव संस्कृत गुरुकुल का उद्घाटन किया।
उन्होंने नक्षत्र पार्क और योग ध्यान केंद्र जनता को समर्पित किए और श्री नरसिंह देव सार्वजनिक पुस्तकालय और खुले रंगमंच की आधारशिला रखी।
विद्वानों, छात्रों और प्रमुख नागरिकों की सभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि श्री नरसिंह देव संस्कृत गुरुकुल की स्थापना भारत की सभ्यतागत जड़ों के साथ एक सार्थक पुनर्संबंध है।
उन्होंने कहा कि यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उपराज्यपाल ने कहा कि घगवाल की भूमि ऐतिहासिक रूप से ज्ञान का एक जीवंत केंद्र रही है जहाँ वैदिक शिक्षाएँ फली-फूलीं और गुरु-शिष्य परंपरा समृद्ध हुई, जिसने छात्रों को जीवन जीने की कला, आलोचनात्मक चिंतन और सत्य की खोज का साहस प्रदान किया।
उपराज्यपाल ने विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी में भारत की तीव्र प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे इस बात पर बल दिया कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक चेतना में निहित है, जिसमें संस्कृत नैतिकता और कर्तव्य पर आधारित संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उपराज्यपाल ने कहा कि संस्कृत सदियों से मानवता के लिए आवश्यक मूल्यों और ज्ञान प्रणालियों का स्रोत रही है। उन्होंने कौटिल्य, चरक, सुश्रुत, भास्करचार्य, ब्रह्मगुप्त, आर्यभट और वराहमिहिर जैसे प्राचीन विद्वानों के गणित, चिकित्सा और दर्शन के क्षेत्र में वैश्विक परंपराओं को आकार देने में किए गए विशाल योगदान को भी याद किया।
उन्होंने समकालीन विश्व के लिए ज्ञान के इस विशाल भंडार की प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए इसे सरल, आधुनिक भाषा में सुलभ बनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
उपराज्यपाल ने गुरुकुल प्रबंधन से परंपरा की गहराई को आधुनिकता की व्यापकता के साथ एकीकृत करते हुए शिक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संस्थान को केवल डिग्री प्रदान करने से आगे बढ़कर संवेदनशील, नैतिक और साहसी व्यक्तित्वों का पोषण करना चाहिए जो समाज का नेतृत्व कर सकें।
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह