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रांची, 06 मई (हि.स.)। झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर घंटों चली इस इस मैराथन बैठक में बिजली उत्पादन, संचरण, ऊर्जा विकास और वितरण निगम के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। राज्य में लगातार हो रही बिजली कटौती और चरमराई व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी प्रमंडलों में दिन-रात संचालित होने वाले कंट्रोल रूम के गठन का निर्देश भी दिया। मुख्य सचिव ने दो टूक कहा कि बिजली आपूर्ति में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अब जवाबदेही तय होगी। उन्होंने फील्ड में तैनात महाप्रबंधकों को केवल कार्यालय तक सीमित न रहने और जमीनी स्तर पर निगरानी करने को कहा।
वहीं संंचरण निगम के एमडी केके वर्मा को ट्रांसमिशन से जुड़ी बाधाओं पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में लगभग 95 प्रतिशत ट्रांसफॉर्मर कार्यरत हैं, जिस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद बिजली बाधित क्यों रहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने से लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने पर संबंधित मुख्य अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई होगी। राज्य के सभी सदर और अनुमंडल अस्पतालों को दो अलग-अलग बिजली स्रोतों से जोड़ने का निर्णय लिया गया, ताकि आपूर्ति बाधित न हो। साथ ही जरेडा को सभी सरकारी अस्पतालों में सोलर पैनल लगाने का दायित्व सौंपा गया। शहरी क्षेत्रों में सीमेंट पोल की जगह ट्यूबलर और रेल पोल लगाने का भी फैसला लिया गया है।
बैठक में ऊर्जा सचिव के श्रीनिवासन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar