गौ आश्रय स्थलों की निगरानी सख्त, सीसीटीवी और कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश
गौ आश्रय स्थलों की सख्त निगरानी के निर्देश, सीसीटीवी और भूसा बैंक व्यवस्था पर जोर
बरेली के विकास भवन सभागार में गौ आश्रय स्थलों की समीक्षा बैठक को संबोधित करते अपर निदेशक पशुपालन डॉ. संजय श्रीवास्तव।


बरेली के विकास भवन सभागार में गौ आश्रय स्थलों की समीक्षा बैठक को संबोधित करते अपर निदेशक पशुपालन डॉ. संजय श्रीवास्तव।


बरेली, 6 मई (हि.स.) । निराश्रित गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। बुधवार को विकास भवन सभागार में आयोजित मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक में अपर निदेशक पशुपालन विभाग एवं नोडल अधिकारी डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बरेली मंडल के सभी गौ आश्रय स्थलों के संचालन, प्रबंधन और गोवंशों के भरण-पोषण की गहन समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि फंड से जुड़ी सभी रिक्वेस्ट समय से पोर्टल पर अपलोड की जाएं, ताकि लाभार्थियों को भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत लाभार्थियों का सत्यापन भी समयबद्ध तरीके से किया जाए। साथ ही कुपोषित परिवारों को इस योजना से जोड़ने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए, जिससे सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को राहत मिल सके।

बैठक में नोडल अधिकारी ने गौ आश्रय स्थलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं और उनकी निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए। इससे गोवंशों की देखभाल और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

आगामी गर्मी और संभावित सूखे को देखते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने भूसा, हरा चारा और पशु आहार की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी गौ आश्रय स्थलों पर लू और गर्मी से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इसके तहत टाट के पर्दे, पर्याप्त पेयजल, टीनशेड की गोबर से लिपाई और छायादार स्थानों की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए।

चारा विकास नीति के तहत चारागाह भूमि पर नेपियर घास के उत्पादन पर भी जोर दिया गया। नोडल अधिकारी ने निर्देश दिए कि शासनादेश के अनुरूप नेपियर रूट का सत्यापन कराया जाए और अधिक से अधिक हरा चारा उत्पादन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कब्जा की गई गोचर भूमि को मुक्त कराकर वहां चारा उत्पादन शुरू कराने के निर्देश उपजिलाधिकारियों और जिला कृषि अधिकारियों को दिए गए।

बैठक में भूसा बैंक स्थापित करने पर भी विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि गौ आश्रय स्थलों में स्थायी और अस्थायी भूसा बैंक बनाए जाएं तथा दानदाताओं से भी भूसा एकत्र किया जाए। भूसा संग्रह स्थलों पर स्पष्ट बोर्ड लगाए जाएं, जिन पर यह अंकित हो कि यह भूसा निराश्रित गोवंश के उपयोग हेतु संरक्षित है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में एक वर्ष की आवश्यकता के अनुसार भूसा का भंडारण सुनिश्चित किया जाए।

इसके अलावा, गौ आश्रय स्थलों में वृक्षारोपण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिला वन अधिकारियों के समन्वय से छायादार और चारा देने वाले पौधे लगाए जाएं तथा उनकी सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड भी लगाए जाएं।

बैठक में अपर निदेशक पशुपालन डॉ. मदन पाल सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर, गौशाला नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार गंगवार, संयुक्त निदेशक पैथोलॉजिस्ट, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. सुषमा सिंह सहित मंडल के सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

नोडल अधिकारी ने अंत में स्पष्ट किया कि गोवंश संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध व प्रभावी तरीके से लागू की जाएं।

हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार