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चित्तौड़गढ़, 06 मई (हि.स.)। आबकारी विभाग पर शराब व्यवसायियों ने जबरन घाटे की दुकानें थमाने और झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। परेशान होकर कई दुकानदार सोमवार को आबकारी कार्यालय पहुंच गए और विरोध जताते हुए अपनी दुकानों की चाबियां अधिकारियों को सौंप दी। शहर की उपनगरीय बस्ती चंदेरिया से करीब आधा दर्जन दुकानों के ताले लगे हैं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया। जिला आबकारी अधिकारी गजेंद्रसिंह राजपुरोहित काफी देर तक शराब व्यवसायियों से अपने कार्यालय में बात की। लेकिन इस संबंध में उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत करने से इनकार कर दिया।
शहर की उपनगरीय बस्ती चंदेरिया के शराब दुकानदार रामचंद्र मेवाड़ा का आरोप है कि जिले में अप्रैल माह से नई दुकानों के टेंडर हो चुके हैं, लेकिन पिछले वर्ष घाटे में रही कुछ दुकानें कोई भी व्यवसायी लेने को तैयार नहीं है। विभाग उन घाटे की दुकानों को मौजूदा ठेकेदारों पर जबरन थोपना चाह रहा है। इसके लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में बुधवार को शराब व्यापारी रामचन्द्र मेवाड़ा, मनोज मेवाड़ा, ओमप्रकाश सुवालका, महेन्द्र सुवालका सहित अन्य सभी आबकारी कार्यालय पहुंचे हैं। मेवाड़ा ने बताया कि जिले में कुछ दुकानें पड़त पड़ी हुई हैं। इसी कड़ी में चंदेरिया क्षेत्र की तीन दुकानें भी हैं। लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी वर्तमान ठेकेदारों पर इन्हें लेने का दबाव बना रहे हैं। इसी के चलते व्यवसायियों ने आबकारी अधिकारी गजेन्द्र राजपुरोहित को अपनी दुकानों की चाबियां सौंप दीं।
दुकान संचालक रामचन्द्र मेवाड़ा ने बताया कि उनके नाम से वर्तमान में 3 दुकानें संचालित हैं। इससे पहले वे घाटे की दुकानें चला चुके हैं, जिससे उन्हें 20 लाख का घाटा हुआ। अब वे और दुकानें चलाने में असमर्थ हैं, लेकिन विभाग उन पर लगातार झूठे मुकदमे बना रहा है। उनकी रोलाहेड़ा और पुठोली स्थित दुकानों पर लगातार झूठे मुकदमे बनाने की धमकियां दी जा रही हैं। सोमवार को भी कपासन से आए आबकारी इंस्पेक्टर उनकी दुकान पर आकर बैठ गए और दबाव बनाने लगे। इस पर दुकान छोड़ कर पूरी दुकान आबकारी इंस्पेक्टर को सुपुर्द कर दी।
इधर, एक अन्य दुकान संचालक महेन्द्र सुवालका ने बताया कि नुकसान की पड़त पड़ी दुकानों को लेने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही जबरन ज्यादा माल उठाने का दबाव भी डाला जाता है। फिलहाल इस मामले में आबकारी विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। विभाग और व्यवसायियों के बीच मामला उलझता दिखाई दे रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल