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लखनऊ, 05 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के योगी मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार से पूरे प्रदेश में स्थानान्तरण नीति लागू कर दी गयी है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से सभी एसीएस, प्रमुख सचिव, सचिव को इस आशय का पत्र भेज दिया गया है। यह स्थानांतरण नीति केवल वर्ष 2026-27 के लिए है और 31 मई 2026 तक ही स्थानांतरण किये जाएंगे।
मुख्य सचिव की ओर से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि समूह क और ख के अफसरों के ट्रासफर को लेकर मानक तय किये गये हैं। इनमें जिले में 3 साल, मंडल में 7 साल होने पर ट्रांसफर किये जा सकेंगे। इतना ही नहीं यह ट्रांसफर सिर्फ 20 फीसदी तक किये जा सकेंगे जबकि 20 प्रतिशत की सीमा से अधिक ट्रांसफर को लेकर निर्देश दिये गये हैं कि इसके मुख्यमंत्री का अनुमोदन अनिवार्य रूप से लेना होगा। इसी प्रकार समूह ख के कर्मचारियों के ट्रांसफर संबंधित विभागाध्यक्ष करेंगे, लेकिन विभागीय मंत्री से विचार विमर्श जरूर किया जायेगा। ट्रांसफर नीति के अनुसार समूह ग और घ के कर्मियों के भी ट्रांसफर किये जाएंगे और इस वर्ग के कर्मचारियों के स्थानान्तरण विभागाध्यक्ष के अनुमोदन के उपरांत किए जाएंगे, लेकिन इनकी संख्या 10 फीसदी से अधिक नहीं होगी। इस स्थानान्तरण नीति में एक अच्छी बात यह भी है कि पति-पत्नी को एक ही जिले में तैनाती मिल सकेगी।
इस स्थानान्तरण नीति के तहत यह भी व्यवस्था है कि मंदित बच्चों और चलने-फिरने के लिहाज से पूर्णतः प्रभावित दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती ऐसे स्थान पर किये जाने की व्यवस्था की गई है, जहां उनकी चिकित्सा देखभाल की उचित व्यवस्था हो। नीति के तहत यह व्यवस्था दी गई है कि स्थानांतरण सत्र के पश्चात समूह क के साथ ही साथ समूह ख के संबंध में विभागीय मंत्री के जरिये मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही तबादला किया जा सकेगा। मुख्य सचिव की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार की यह स्थानान्तरण नीति सचिवालय में लागू नहीं होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह