भौतिक सुखों से नहीं मिलती स्थायी शांति, कर्मों के अनुसार ही मिलता फल-स्वामी राम स्वरूप जी
कठुआ, 04 मई (हि.स.)। वेद मंदिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों पर आधारित यज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है। इस दौरान प्रसिद्ध योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने ऋग्वेद मंत्र 1/164/20 पर गहन प्रवचन देते हुए जीवन के गूढ़ आध
Material pleasures do not bring lasting peace, the fruits are obtained according to the deeds - Swami Ram Swarup Ji


कठुआ, 04 मई (हि.स.)। वेद मंदिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों पर आधारित यज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है। इस दौरान प्रसिद्ध योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने ऋग्वेद मंत्र 1/164/20 पर गहन प्रवचन देते हुए जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक सत्य को सरल भाषा में समझाया।

उन्होंने बताया कि इस मंत्र में एक पेड़ पर बैठे दो पक्षियों का उदाहरण दिया गया है, जो मानव जीवन का प्रतीक है। पेड़ को मानव शरीर बताया गया, जो नश्वर है, जबकि दो पक्षी जीवात्मा और परमात्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि फल खाने वाला पक्षी जीवात्मा है, जो अपने कर्मों के अनुसार सुख-दुख भोगता है। मनुष्य द्वारा किए गए हर अच्छे या बुरे कर्म का फल उसे अवश्य मिलता है, जिससे वह संसार के बंधनों में फंसा रहता है। वहीं दूसरा पक्षी परमात्मा है, जो केवल साक्षी भाव में रहकर सब कुछ देखता है, लेकिन किसी कर्म में लिप्त नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमात्मा सर्वव्यापी, सर्वज्ञ और न्यायकारी है, जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करता है। ईश्वर किसी के साथ पक्षपात नहीं करता, बल्कि प्रकृति के नियमों के अनुसार न्याय सुनिश्चित करता है। अपने प्रवचन में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांतों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सभी धर्मग्रंथ एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं अज्ञान और मोह से ऊपर उठकर कर्तव्य और आत्मज्ञान की ओर बढ़ना।

स्वामी राम स्वरूप ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है, जिसे वेदों के ज्ञान (ब्रह्म विद्या) को समझने और अपनाने में लगाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागने से कभी स्थायी शांति नहीं मिलती, बल्कि इससे इच्छाएं और बढ़ती हैं। प्रवचन के अंत में उन्होंने आत्मचिंतन, संयमित जीवन और वेदों के नियमित अध्ययन का आह्वान किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस ज्ञानवर्धक प्रवचन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन से जीवन में नैतिक मूल्यों और आंतरिक शांति का विकास होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया