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पूर्वी सिंहभूम, 04 मई (हि.स.)। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के वरिष्ठ आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने सोमवार को गदरा स्थित जागृति कीर्तन मंडप हॉल में आयोजित आध्यात्मिक सभा में साधकों को संबोधित करते हुए तंत्र साधना की महत्ता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि साधना का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को उसकी निम्न प्रवृत्तियों से ऊपर उठाकर उच्चतम चेतना तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
अपने प्रवचन में आचार्य ने स्पष्ट किया कि हर मनुष्य जन्म से ही विभिन्न प्रवृत्तियों के प्रभाव में रहता है, जिनमें पशुवत गुण भी शामिल होते हैं। लेकिन अनुशासित साधना, संयम और आत्मचिंतन से वह धीरे-धीरे अपने भीतर की शक्ति को जागृत कर वीरता की अवस्था में प्रवेश करता है। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए साधक अंततः दिव्यता को प्राप्त करता है, जो जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।
तंत्र शास्त्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक श्लोक के माध्यम से समझाया कि इस धरती पर सभी मनुष्य प्रारंभिक अवस्था में पशु प्रवृत्तियों से युक्त होते हैं, लेेेकिन ज्ञान और साधना के प्रकाश से उनमें वीरभाव का उदय होता है और उसी के सहारे वे क्रमशः देवत्व की ओर अग्रसर होते हैं।
उन्होंने साधकों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो लोग इस त्याग और साधना के मार्ग पर चल रहे हैं, वे न केवल अपने जीवन को ऊंचाई दे रहे हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। ऐसे साधक ही भविष्य में देवमानव बनकर समाज को नई दिशा देने का कार्य करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक