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नई दिल्ली, 04 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल एवं पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में आए जनादेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन चुनावों के परिणाम देश की लोकतांत्रिक चेतना की परिपक्वता का सशक्त प्रमाण हैं। व्यापक जनभागीदारी एवं युवाओं की सक्रिय उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत का मतदाता अधिक सजग, जिम्मेदार और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्ध हो चुका है।
अभाविप ने कहा कि विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में प्राप्त जनादेश एक ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत देता है। यह परिणाम केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि भयमुक्त, विकासोन्मुख और राष्ट्रवादी शासन व्यवस्था की स्थापना का स्पष्ट संदेश है। लंबे समय से प्रदेश में व्याप्त राजनीतिक हिंसा, अराजकता, सिंडिकेट संस्कृति, शिक्षा में गिरावट, महिला असुरक्षा, बांग्लादेशी घुसपैठ तथा रोजगार के सीमित अवसरों के विरुद्ध जो जनभावना विकसित हो रही थी, वह आज स्पष्ट रूप से परिणामों में परिलक्षित हुई है।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आया यह जनादेश एक नए सूर्योदय का प्रतीक है। यह केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि समाज के भीतर जागृत राष्ट्रीय चेतना का परिणाम है। आने वाले समय में प्रदेश में शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और सुशासन के क्षेत्र में ठोस एवं सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि अभाविप इस जनादेश का स्वागत करती है और आशा करती है कि नई शासन व्यवस्था प्रदेश को हिंसा और भय से मुक्त कर विकास, पारदर्शिता और राष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित एक सशक्त दिशा प्रदान करेगी।
वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप ने पश्चिम बंगाल में वर्षों से शिक्षा, नारी सुरक्षा, छात्र अधिकार, रोजगार एवं अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों को लेकर निरंतर संघर्ष किया है। आज का यह जनादेश उन सभी प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करता है और यह विश्वास जगाता है कि प्रदेश अब एक भयमुक्त और सुशासित वातावरण की ओर अग्रसर होगा।
उन्होंने कहा कि असम में प्राप्त जनादेश भी स्थिरता एवं विकास के पक्ष में जनता के विश्वास को दर्शाता है। वहीं तमिलनाडु, केरल एवं पुडुचेरी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी यह संकेत देती है कि देशभर में जनचेतना निरंतर सशक्त हो रही है और नागरिक सक्रिय रूप से राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिणामों से यह भी स्पष्ट होता है कि देश की जनता हिंसा, अराजकता एवं वैचारिक अतिरेकों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। समाज एक ऐसे मार्ग का समर्थन कर रहा है जो शांति, विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देता है।
वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप का मानना है कि यह जनादेश “राष्ट्र प्रथम” की भावना को सशक्त करता है। यह स्पष्ट संकेत है कि देश की जनता अब तुष्टिकरण एवं अव्यवस्था की राजनीति को अस्वीकार कर सुशासन, सुरक्षा एवं विकास को प्राथमिकता दे रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी