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गुवाहाटी, 04 मई (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने बीते 3 मई को एक नवनिर्मित बड़े पुल संख्या 7 को सफलतापूर्वक चालू कर बुनियादी ढांचे के उन्नयन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। यह पुल लामडिंग मंडल के अंतर्गत चापरमुख-सेनचोवा सेक्शन में एक स्थायी ट्रैक डायवर्जन के साथ बनाया गया है। इस नए पुल में प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लैब और ओपन वेब गर्डर का एक संयोजन है, जो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। यह पुल उस स्थान पर मौजूद पुराने पुल की जगह लेगा।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने साेमवार काे बताया कि पुराना पुल मूल रूप से मीटर गेज का था, जिसे 1994 में ब्रॉड गेज में रूपांतरण के दौरान मजबूती देकर बनाए रखा गया था। हालांकि, इसमें परिचालन संबंधी सीमाएं थीं और इस पर 40 किमी प्रति घंटे की परमानेंट स्पीड रेस्ट्रिक्शन (पीएसआर) लागू था। आधुनिकीकरण और बेहतर सुरक्षा की तकनीकी आवश्यकता को देखते हुए, रेल मंडल ने इस सेक्शन में ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए, एक स्थायी वैकल्पिक मार्ग निर्माण के साथ-साथ पुल के पुनर्निर्माण का कार्य भी शुरू किया।
नए पुल और वैकल्पिक ट्रैक को, लगभग छह घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान चलाए गए एक सुनियोजित कट-एंड- कनेक्शन अभियान के माध्यम से, दोनों छोर पर मौजूदा चालू लाइन से सफलतापूर्वक जोड़ा गया। परिचालन संबंधी चुनौतियों के बावजूद, यह कार्य अत्यंत कुशलता से पूरा किया गया और उसी दिन इस सेक्शन को ट्रेनों की आवाजाही के लिए चालू कर दिया गया। यह उपलब्धि इंजीनियरिंग और परिचालन टीमों द्वारा की गई उच्च स्तरीय योजना, समन्वय और कार्य-निष्पादन का प्रमाण है।
इस अपग्रेडेड बुनियादी ढांचे के चालू होने से पहले लागू 40 किमी प्रति घंटे की गति सीमा समाप्त हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप इस सेक्शन में परिचालन दक्षता में सुधार हुआ है, सुरक्षा बढ़ी है और ट्रेनों का परिचालन अधिक सुगम हो गया है। यह उपलब्धि इस क्षेत्र में रेल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने तथा यात्रियों और माल ढुलाई के लिए विश्वसनीय सेवाएं सुनिश्चित करने के प्रति एनएफआऱ की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।-----------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय