अरुणाचल में आरक्षण नीति काे लेकर एएफटीएफ ने सरकार को दिया 30 दिन का अल्टीमेटम
इटानगर, 27 मई (हि.स.)। अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट (एएफटीएफ) ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश सरकार से राज्य की नौकरियों में लागू 80 : 20 आरक्षण नीति को समाप्त करने की मांग की। संगठन ने इस मुद्दे के समाधान के लिए सरकार को 30 दिनों का समय भी दिया है
अरुणाचल में आरक्षण नीति काे लेकर एएफटीएफ ने सरकार को दिया 30 दिन का अल्टीमेटम


इटानगर, 27 मई (हि.स.)। अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट (एएफटीएफ) ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश सरकार से राज्य की नौकरियों में लागू 80 : 20 आरक्षण नीति को समाप्त करने की मांग की। संगठन ने इस मुद्दे के समाधान के लिए सरकार को 30 दिनों का समय भी दिया है।

अरुणाचल प्रेस क्लब में शुक्रवार काे आयाेजित प्रेसवार्ता में एएफटीएफ के अध्यक्ष ताडक नालो ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 1990 में नौकरियों में 80 : 20 आरक्षण नीति लागू की थी, लेकिन इसके बाद कभी इसकी आवश्यकता या प्रासंगिकता की समीक्षा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि आज भी अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीएससी) और अरुणाचल प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (एपीएसएसबी) की भर्ती परीक्षाओं तथा सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में यही अनुपात लागू है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत 80 प्रतिशत पद अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजाति (एसटी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, जबकि शेष 20 प्रतिशत पद अनारक्षित श्रेणी में आते हैं।

ताडक नालो ने दावा किया कि विस्तृत अध्ययन और शोध से यह सामने आया है कि पूर्वोत्तर भारत के अन्य जनजातीय राज्यों में इस प्रकार की आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, सिक्किम और असम जैसे राज्यों में केवल राज्य के मूल निवासी ही भर्ती परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं, जिससे बाहरी लोगों की भागीदारी सीमित रहती है।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक “100 प्रतिशत आदिवासी राज्य” है, इसके बावजूद यहां 80:20 आरक्षण नीति जारी है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक ढांचे पर पड़ रहा है।

एएफटीएफ ने राज्य सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार कर 80:20 अनुपात को समाप्त करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए वैध अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) तथा अरुणाचल प्रदेश की जनजातीय बोलियों का ज्ञान अनिवार्य किया जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।------------------

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी