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कठुआ, 02 मई (हि.स.)। योल स्थित वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञ के दौरान योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप ने अथर्ववेद के मंत्रों पर आधारित गहन प्रवचन देते हुए पृथ्वी को ‘माता’ मानकर उसके संरक्षण का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी सभी जीवों का पालन-पोषण करती है और अन्न, वनस्पति, फल-फूल व औषधियों का स्रोत है। “माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः” मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हर मनुष्य को स्वयं को पृथ्वी का पुत्र मानकर पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। स्वामी जी ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलते हुए श्रेष्ठ जीवन जिया और यही वैदिक ज्ञान आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने लोगों से वैदिक ज्ञान अपनाकर जीवन में शांति, समृद्धि और संतुलन स्थापित करने की अपील की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और वैदिक शिक्षाओं से प्रेरणा ली।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया