भुवनेश्वर में ‘प्रज्ञा प्रेरणा’ कार्यशाला का शुभारंभ
स्वायत्तता, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से ओडिशा के शैक्षणिक संस्थान देश के लिए आदर्श मॉडल बनें: धर्मेन्द्र प्रधान भुवनेश्वर, 02 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “प्रज्ञा प्रेरणा” म
भुवनेश्वर में ‘प्रज्ञा प्रेरणा’ कार्यशाला का शुभारंभ


स्वायत्तता, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से ओडिशा के शैक्षणिक संस्थान देश के लिए आदर्श मॉडल बनें: धर्मेन्द्र प्रधान

भुवनेश्वर, 02 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “प्रज्ञा प्रेरणा” में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ओडिशा के शैक्षणिक संस्थानों से स्वायत्तता, नवाचार और अनुसंधान को अपनाकर देश के लिए आदर्श मॉडल बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का आयोजन ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी , उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद और प्राध्यापक उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा को “ज्ञान की भूमि” बताते हुए कहा कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत शिक्षा के क्षेत्र में इसकी समृद्ध परंपरा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रहकर विचार निर्माण और नवाचार को प्राथमिकता देनी चाहिए।

धर्मेन्द्र प्रधान ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि ओडिशा की समुद्री तटरेखा, खनिज संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रणाली को तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही, स्थानीय इतिहास, परंपराओं और महान व्यक्तित्वों के योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ और ‘अपार आईडी’ जैसी व्यवस्थाएं छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करेंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ऑनलाइन शिक्षा माध्यमों के जरिए दूरदराज क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर भी बल दिया गया।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ज्ञान-आधारित समाज के रूप में उभर रहा है और ओडिशा की युवा आबादी राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने मातृभाषा आधारित शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

इस अवसर पर छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए ‘इंटर्नशिप और कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस’ पुस्तिका का विमोचन किया गया। साथ ही, महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए “शक्तिश्री” मोबाइल ऐप का शुभारंभ भी किया गया।

कार्यशाला को शिक्षा क्षेत्र में सुधार और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शिक्षा क्षेत्र में ‘क्रांतिकारी परिवर्तन’ का आह्वान किया

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के शैक्षिक वातावरण में “क्रांतिकारी परिवर्तन” लाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा को भारत की “ज्ञान राजधानी” के रूप में विकसित करने के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जड़ता को समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार यह नीति केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक “नॉलेज कैपिटल” बनाने का एक महत्वपूर्ण मिशन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता की प्रगति की आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में प्रतिबद्ध है कि छात्र-छात्राएं “इंडस्ट्री-रेडी” बनें और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों।

शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शिक्षा क्षेत्र में 41,273 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने में सहायक होगा।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षिक असमानता को कम करने के लिए सरकार ने ‘गोदावरीश मिश्र आदर्श विद्यालय’ योजना शुरू की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 12,000 करोड़ रुपये की लागत से राज्य की 6,794 ग्राम पंचायतों में आधुनिक विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इन विद्यालयों में उन्नत कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीण छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने उच्च शिक्षा में एसईबीसी वर्ग के लिए 11.25 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों में ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए ‘शहीद माधो सिंह हाथ खर्च योजना’ के तहत प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये पहल समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और राज्य के समग्र शैक्षिक विकास को नई दिशा देंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो