रतिया के पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा की 'घर वापसी, थामा भाजपा का दामन
फतेहाबाद, 02 मई (हि.स.)। जिले की राजनीति में दल-बदल का दौर जारी है। इसी कड़ी में रतिया विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में वापसी कर ली है। शनिवार को हिसार के उकलाना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नाप
फतेहाबाद। पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा का स्वागत करते प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली व जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा।


फतेहाबाद, 02 मई (हि.स.)। जिले की राजनीति में दल-बदल का दौर जारी है। इसी कड़ी में रतिया विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में वापसी कर ली है। शनिवार को हिसार के उकलाना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नापा ने विधिवत रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली व फतेहाबाद जिलाध्यक्ष प्रवीन जोडा की उपस्थिति में लक्ष्मण नापा ने पार्टी का पटका पहनकर अपनी पुरानी पारी की शुरुआत की। लक्ष्मण नापा के साथ ओड सभा हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष डा. रणजीत ओड व सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई ने भी भाजपा का दामन थामा। इस अवसर पर बड़ोली ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि लक्ष्मण नापा के आने से न केवल रतिया बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पार्टी को मजबूती मिलेगी। पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की जनकल्याणकारी नीतियों से प्रभावित हैं और इन्हीं नीतियों के चलते वह दोबारा से भाजपा में आए हैं। सूत्रों के अनुसार, नापा के समर्थक लगातार उन पर वापस भाजपा में जाने का दबाव बना रहे थे। नापा ने अपनी वापसी को 'घर वापसी करार दिया और कहा कि वे वैचारिक रूप से हमेशा भाजपा के साथ रहे हैं।

अक्टूबर 2024 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने रतिया सीट से लक्ष्मण नापा का टिकट काट दिया था। पार्टी ने उनकी जगह पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल को मैदान में उतारा। टिकट कटने से नाराज होकर नापा ने बगावती रुख अपनाया और चुनाव से ठीक पहले भाजपा को अलविदा कह दिया था।

भाजपा छोडऩे के बाद लक्ष्मण नापा ने पूर्व मु यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की उपस्थिति में कांग्रेस का हाथ थामा था। कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस उन्हें चुनावी मैदान में उतारेगी या उन्हें कोई बड़ी जि मेदारी देगी, लेकिन समय के साथ समीकरण बदले और वे कांग्रेस में खुद को असहज महसूस करने लगे। कुछ महीनों के 'वनवास' के बाद नापा ने अब फिर से कमल का दामन थाम लिया है। रतिया की राजनीति के जानकारों का मानना है कि उनकी वापसी से भाजपा का जमीनी आधार फिर से मजबूत होगा, विशेषकर दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच।

हिन्दुस्थान समाचार / अर्जुन जग्गा