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--बिसावर में सालों से बदहाल पड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल, महापंचायत की घोषणा के बाद हरकत में आया प्रशासन
हाथरस, 14 मई (हि.स.)। क्षेत्र में स्थित 76 वर्ष पुराना आयुर्वेदिक अस्पताल बदहाली का शिकार है। कभी दर्जनों गांवों के लोगों को सस्ता इलाज मुहैया कराने वाला यह अस्पताल अब खंडहर में बदल चुका है। परिसर में गंदगी और कूड़े के ढेर लगे हैं, जबकि भवन जर्जर हालत में है। इसकी दुर्दशा को लेकर क्षेत्रीय लोगों में लम्बे समय से रोष था, जिसके बाद 16 मई को अस्पताल के पुनर्निर्माण और बदहाली के विरोध में महा पंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई। महापंचायत की घोषणा के बाद प्रशासन हरकत में आया।
गुरुवार को एसडीएम मनीष चौधरी ने खंड विकास अधिकारी सुरेश कुमार और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी नरेंद्र कुमार के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की जर्जर स्थिति और परिसर में फैली गंदगी देखकर एसडीएम ने तत्काल खंड विकास अधिकारी को सफाई कराने के निर्देश दिए। एसडीएम ने बताया कि ग्रामीण अस्पताल को लेकर जागरूक हैं। उन्होंने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी के माध्यम से अस्पताल की भूमि और रिकॉर्ड की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि भूमि का हस्तांतरण कैसे हुआ और कब से आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने यहां बैठना बंद कर दिया। रिकॉर्ड की पूरी जानकारी मिलने के बाद अस्पताल के कायाकल्प की दिशा में आगे कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1950 में बिसावर के गांव नगला मदारी निवासी दानवीर सेठ राम सहाय ने अपनी कमाई से इस आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कराया था। बाद में उन्होंने इसे समाजहित में जिला परिषद मथुरा को समर्पित कर दिया। उस समय यह अस्पताल क्षेत्र में आयुर्वेदिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र था और प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने आते थे। इससे आसपास के करीब दो हजार लोग लाभान्वित होते थे। हालांकि, वर्ष 1997 में हाथरस जिला बनने के बाद प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अस्पताल की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। धीरे-धीरे यहां से स्टाफ, दवाएं और अन्य सुविधाएं समाप्त हो गईं, जिससे अस्पताल बदहाली का शिकार हो गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना