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अजमेर, 12 मई(हि.स.)। स्पेशल आपरेशन ग्रुप ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी डिग्री और अंंकतालिकाएं तैयार करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित को अदालत में पेश किया गया जहां से उसे 14 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर विश्नोई ने बताया कि वीरेंद्र सिंह की पिछले छह महीनों से तलाश की जा रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपित लगातार मोबाइल फोन बंद रखकर फरार चल रहा था। एसओजी की टीम उसकी गतिविधियों और संभावित लोकेशन पर लगातार नजर बनाए हुए थी।
तकनीकी सूचनाओं और निगरानी के आधार पर 10 मई तो आखिरकार उसे गाजियाबाद से पकड़ लिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपित मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के नाम से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं तैयार करने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। जाचं एजेंसी को आशंका है कि यह गिरोह राजस्थान के अलावा दिल्ली,एनसीआर और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल है। फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किन तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
एसओजी की ओर से मामले की पैरवी कर रहे विशिष्ट लोक अभियोजक शशि प्रकाश इंदौरिया ने अदालत को बताया कि आरोपित से गाजियाबाद, दिल्ली, और अन्य स्थानों पर जाकर विस्तृत पूछताछ और अनुसंधान किया जाना आवश्यक है। इस पर अदालत ने आरोपित का पुलिस रिमांड मंजूर किया।
गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया था जब राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्कूल लेक्चरर भीर्ती परीक्षा 2022 में शामिल दो महिला अभ्यर्थियों ब्रह्मा कुमारी और कमला कुमारी की डिग्रियां फर्जी पाई गई। इसके बाद आयोग ने सिविल लाइंस थाने में अलग अलग मुकदमें दर्ज करवाए थे। जांच के दौरान एसओजी अब तक ब्रह्मा कुमारी, कमला कुमारी, सरकारी शिक्षक दलपत सिंह, डॉ सुरेश विशनोई और पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा समेत करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष