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नई दिल्ली, 12 मई (हि.स)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) का मजबूत प्रदर्शन वित्त वर्ष 2025-26 में भी जारी रहा। इस दौरान बैंकों ने परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के साथ रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है।
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में बताया कि ये लगातार चौथा वर्ष है जब सरकारी बैंक मुनाफे में रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार, ऋण के स्वस्थ विस्तार और आय में वृद्धि ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकारी बैंकों की लाभप्रदता में योगदान दिया।
मंत्रालय के अनुसार बैंकों का कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि कुल शुद्ध लाभ में वार्षिक आधार पर 11.1 फीसदी की वृद्धि हुई। यह ऐतिहासिक रूप से 1.98 लाख करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लगातार चौथे वर्ष लाभप्रदता रही।
सरकारी बैंकों का कुल कारोबार 31 मार्च, 2026 तक 283.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.8 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, कुल जमा राशि सालाना आधार पर 10.6 फीसदी बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये रही, जो जमाकर्ताओं के निरंतर भरोसे और बैंकों द्वारा मजबूत संसाधन जुटाने का परिणाम है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक बैंकों के कुल ऋण में सालाना आधार पर 15.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह 127 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि रही। यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की निरंतर मांग का संकेत है।
इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार के साथ अब तक की सबसे कम गैर-निष्पादित परिसंपत्ति दर्ज की है, इन बैंको का सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.93 फीसदी और शुद्ध एनपीए अनुपात भी 31 मार्च, 2026 तक घटकर 0.39 फीसदी हो गया - जो ऐतिहासिक रूप से सबसे न्यूनतम स्तर है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन जारी रखा, जो निरंतर व्यापार वृद्धि, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, रिकॉर्ड लाभप्रदता और मजबूत पूंजी की स्थिति को दर्शाता है।’’ मंत्रालय ने आगे कहा कि यह बेहतर प्रदर्शन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की ऋण जरूरतों को पूरा करने में इन पीएसयू बैंकों की स्थिरता और बढ़ी हुई संस्थागत क्षमता को सिद्ध करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर