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बलरामपुर, 12 मई (हि.स.)। कभी घर और खेत तक सीमित रहने वाली ग्राम बड़कीमहरी की संगीता यादव आज आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
संगीता यादव का परिवार पहले खेती-किसानी पर निर्भर था। सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता था। इसी दौरान उन्होंने बिहान योजना के तहत मां भवानी स्व-सहायता समूह से जुड़कर नई शुरुआत की। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण मिलने के बाद उनके जीवन ने नई दिशा पकड़ ली।
संगीता बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें पशुपालन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पशुओं की देखभाल, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के नए तरीके सीखे। इसके बाद वे गांव में “पशु सखी” के रूप में काम करने लगीं। अब वे ग्रामीणों को पशुओं की देखभाल संबंधी जानकारी देने के साथ पशु चिकित्सकों तक सूचना पहुंचाने का काम भी करती हैं।
उन्होंने ग्राम संगठन से ऋण लेकर भैंस पालन शुरू किया। दूध बेचने से घर में नियमित आमदनी आने लगी। इसके साथ ही बकरी पालन शुरू कर सालाना करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय भी हासिल करने लगीं।
मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर संगीता ने आगे बढ़ते हुए ऋण लेकर दो ट्रैक्टर भी खरीदे। आज उनके पति ट्रैक्टर संचालन और खेती-किसानी का कार्य कर रहे हैं। परिवार ने मेहनत से कमाई कर ऋण की पूरी राशि किस्तों में चुका दी। अब संगीता गांव में “लखपति दीदी” के नाम से पहचानी जाती हैं।
संगीता कहती हैं, “पहले लोग हमें सिर्फ गृहिणी समझते थे, लेकिन आज हमारी पहचान एक कामयाब महिला के रूप में है। अब गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनने के लिए आगे आ रही हैं।”
आज संगीता यादव सिर्फ एक महिला नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय