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धर्मशाला, 12 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा मंगलवार को एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सहायक आचार्य, अर्थशास्त्र विभाग, सीयू के देहरा कैंपस के डाॅ. कमल सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने भारत में महिला रोजगार: पीएलएफएस (2017-2024) से साक्ष्य तथा 16वां वित्त आयोग : प्रमुख मुद्दे, चुनौतियां और 15वें वित्त आयोग से निरंतरताएं विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।
अपने व्याख्यान में डाॅ. कमल सिंह ने कहा कि वित्त आयोग भारत का एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में किया जाता है। इसका प्रमुख कार्य केंद्र एवं राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण की अनुशंसा करना तथा राजकोषीय संतुलन सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि वित्त आयोग का उद्देश्य देशभर में संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
उन्होंने आगे कहा कि 16वें वित्त आयोग (2026-31) द्वारा राजकोषीय संघवाद में कई महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है। इनमें विभिन्न राज्यों को दिए जाने वाले राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करने का प्रस्ताव विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस निर्णय से विशेषकर उन राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है, जिन पर ऋण भार अधिक है और जो संरचनात्मक राजस्व घाटे से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने से राज्यों पर अपने वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने का दबाव लगातार बढ़ेगा।
अपने दूसरे व्याख्यान में डाॅ. कमल सिंह ने महिला रोजगार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में बेरोजगारी का अनुपात कम है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। यदि इन योजनाओं को स्थानीय, राज्य एवं केंद्रीय स्तर पर कार्यरत सरकारी तथा निजी संस्थाओं के सहयोग से प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो महिला रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया