Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

मुंबई, 12 मई (हि.स.) । मुंबई से सटे ठाणे के लोगों को इस समय आसमान से सचमुच अंगारे बरसने का एहसास हो रहा है। रविवार और सोमवार को 41 डिग्री सेल्सियस के पार तापमान ने शहर को सचमुच झुलसा दिया था। हालांकि मंगलवार को पारा गिरकर 38.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, लेकिन चिलचिलाती गर्मी अभी भी ठाणे के लोगों का जीना मुश्किल कर रही है। कभी हरियाली की गोद में बसा ठाणे अब कंक्रीट की गर्म दीवारों के नीचे दम घुट रहा है।
म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (टीएमसी)के आपदा प्रबंधन इकाई की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक लगातार दो दिनों से 41 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहे तापमान में मंगलवार को करीब तीन डिग्री की कमी आई है। हालांकि, माहौल में बढ़ी नमी और गर्मी की वजह से लोगों को ज्यादा राहत नहीं मिल सकी। दोपहर में सड़कों पर भीड़ कम थी, लेकिन कई लोगों ने ज़रूरी काम के अलावा अपने घरों से बाहर निकलने से परहेज़ किया।बच्चों, बुज़ुर्गों और सड़क पर काम करने वाले और आने-जाने वाले लोग गर्मी से खास तौर पर परेशान हैं। दोपहर में लोग बस स्टैंड, चौराहों और बाज़ारों में छांव ढूंढते दिखे हैं।
शहर में बढ़ती कंक्रीटिंग, पेड़ों की बेतहाशा कटाई, पहाड़ियों का सपाट होना और घटती हरियाली ठाणे की कुदरती खूबसूरती को खत्म कर रही है। पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने कहा कि जो शहर कभी झीलों, पहाड़ियों और पेड़ों से सुहावना हुआ करता था, अब गर्मी की लहरों में तप रहा है।
इस बीच, चिंता जताई जा रही है कि मौसम में यह बदलाव सिर्फ़ मौसम का नतीजा नहीं है, बल्कि पारिस्थितिक असुंतलन का संकेत है।
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ प्रशांत सिनकर का कहना है, “बढ़ता पारा कुदरत से छेड़छाड़ की एक गंभीर चेतावनी है। हालांकि डेवलपमेंट ज़रूरी है, लेकिन हरियाली की कीमत पर डेवलपमेंट भविष्य में ठाणे को और भी गर्म बना सकता है। अगर शहर के पेड़ों, पहाड़ियों और कुदरती ग्रीन बेल्ट को नहीं बचाया गया, तो ठाणे के ‘हीट आइलैंड’ बनने का खतरा और भी बढ़ जाएगा।”
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा