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बलरामपुर, 12 मई (हि.स.)। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद हौसला मजबूत हो तो सपनों की उड़ान नहीं रुकती। विकासखंड बलरामपुर के ग्राम सरनाडीह की रहने वाली काजल इसकी मिसाल बनकर उभरी हैं। श्रमिक परिवार से आने वाली काजल आज बीसीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं और अपने भविष्य को नई दिशा देने में जुटी हैं। उनके इस सफर में मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना बड़ा सहारा बनी है।
काजल के पिता कृषि मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता पूनम का श्रम पंजीयन है। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। वे चाहते थे कि काजल उच्च शिक्षा हासिल कर आत्मनिर्भर बने, लेकिन खर्च उठाना आसान नहीं था।
इसी बीच श्रम विभाग की मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना ने परिवार को राहत दी। योजना के तहत काजल को 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली, जिससे उनकी पढ़ाई, शिक्षण शुल्क और अन्य जरूरी खर्च पूरे करने में मदद मिल रही है।
काजल बताती हैं कि आर्थिक सहायता मिलने के बाद पढ़ाई जारी रखना काफी आसान हो गया है। अब वे अपने भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मां गृहिणी होने के साथ मजदूरी भी करती हैं, लेकिन परिवार ने हमेशा बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी।
काजल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और श्रम विभाग के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के जरिए प्रदेश की हजारों बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक संबल मिल रहा है। जिले में भी इस योजना के तहत अब तक 182 विद्यार्थियों को लाभ मिल चुका है। योजना जरूरतमंद विद्यार्थियों को न सिर्फ आर्थिक सहायता दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर भी प्रदान कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय