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कठुआ, 12 मई (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा चलाए जा रहे 100 दिवसीय नशा मुक्ति जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जीएमसी कठुआ के डि-एडिक्शन (नशा छुड़ाओ) केंद्र में बेड की संख्या 10 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है, ताकि नशे से जूझ रहे लोगों को बेहतर इलाज और सुविधाएं मिल सकें।
जीएमसी कठुआ के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल मेडिकल कमिशन के दिशा-निर्देशों के तहत पिछले दो वर्षों से केंद्र में 10 बेड की सुविधा संचालित की जा रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 22 कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद है, जो नशा पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। डॉ. अत्री ने यह भी बताया कि समाज के कई उच्च वर्ग के लोग नशा मुक्ति केंद्र में आने से कतराते हैं, क्योंकि वे अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते। उन्होंने इसे नशा उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने नशा पीड़ितों और उनके परिजनों से अपील करते हुए कहा कि इलाज की दिशा में पहला कदम परिवार को ही उठाना होगा। यदि परिजन आगे बढ़कर अपने बच्चों और सदस्यों का उपचार कराएं तभी उन्हें नशे की लत से बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही जम्मू-कश्मीर को नशा मुक्त बनाया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया