हृदयनारायण दीक्षित
अनुशासनविहीन जीवन में स्वस्ति और लोकमंगल नहीं होते। प्रकृति स्वयं अनुशासन में गतिशील है। मनुष्य के लिए इसी अनुशासन का पालन उपयोगी दिनचर्या है। इसका सम्बंध स्वस्थ मन से है। स्वस्थ बुद्धि से है और निर्मल आत्मा से भी है। उत्तर प्रद
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