Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

नई दिल्ली, 05 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वितरण के लिए आने वाली दवाओं की कालाबाजारी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में करीब 70 लाख रुपये कीमत की दवाएं बरामद की गई हैं। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपिताें को गिरफ्तार किया है, जिनमें अस्पताल कर्मी भी शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने रविवार काे बताया कि क्राइम ब्रांच की एनआर-2 टीम के इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की। पुलिस को एसआई प्रीतम चंद द्वारा विकसित की गई पुख्ता सूचना के आधार पर इस गिरोह का सुराग मिला था। इसके बाद एक विशेष टीम का गठन कर दाे अप्रैल को तीस हजारी स्थित जय भारत ट्रांसपोर्ट, राजेंद्र मार्केट में छापा मारा गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया को एक महिंद्रा चैंपियन टेंपो और एक कार में भारी मात्रा में दवाएं ले जाते हुए गिरफ्तार किया। बरामद दवाओं में एंटीबायोटिक्स और गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली इंजेक्शन शामिल हैं, जैसे सेफिक्सिम, अमॉक्सीसिलिन, सेफ्ट्रियाक्सोन, मेरोपेनम और रेबीज एंटीसीरम आदि।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह पिछले डेढ़ साल से सक्रिय था और दिल्ली से सरकारी दवाएं अवैध रूप से निकालकर विभिन्न शहरों में सप्लाई कर रहा था। मुख्य आरोपित नीरज कुमार सहारनपुर का थोक दवा व्यापारी है, जो ‘आदित्य फार्मेसी’ के नाम से कारोबार करता है। वह इन दवाओं को सस्ते में खरीदकर बाजार में बेचता था।
जांच के दौरान पुलिस ने दो और आरोपिताें को दबाेचा। जिनमें डीडीयू अस्पताल का फार्मासिस्ट/स्टोर कीपर बिनेश कुमार और कॉन्ट्रैक्ट हेल्पर प्रकाश मेहतो शामिल हैं। ये दोनों अस्पताल के स्टॉक से दवाएं निकालकर रिकॉर्ड में हेरफेर करते थे और गिरोह के अन्य सदस्यों को सप्लाई करते थे। पुलिस के अनुसार, सुशील कुमार परिवहन में सहयोग करता था, जबकि लक्ष्मण मुखिया टेंपो चालक के रूप में बड़ी खेप को ट्रांसपोर्ट हब तक पहुंचाता था। गिरोह के सदस्य आपस में बिचौलियों के जरिए जुड़े हुए थे और डिजिटल माध्यमों से लेनदेन भी करते थे।
पुलिस अधिकारी के अनुसार सभी बरामद दवाओं और वाहनों को जब्त कर लिया है और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने, वित्तीय लेनदेन की जांच करने और पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी