हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
परिवार के तीन सदस्य अभी भी हैं लापता नैनीताल, 30 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चार सदस्यीय परिवार के रहस्यमय ढंग से लापता होने और महिला की हत्या के मामले में आरोपित को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने माम
हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की


परिवार के तीन सदस्य अभी भी हैं लापता

नैनीताल, 30 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चार सदस्यीय परिवार के रहस्यमय ढंग से लापता होने और महिला की हत्या के मामले में आरोपित को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

मामले के अनुसार 2016 में पटेल नगर थाना देहरादून में दर्ज एफआईआर के तहत आरोपित राजीव सिंह ने अपनी पत्नी गीता सिंह, पुत्री इशिका, पुत्र अरु और सास मिथलेश कुमारी के लापता होने की सूचना देते हुए बताया था कि जनवरी 2015 में ये सभी माता वैष्णो देवी मंदिर के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। बाद में सास की ओर से हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में होने की सूचना दी गई, जिसके बाद संपर्क पूरी तरह टूट गया। जांच के दौरान पुलिस को गीता सिंह का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण शॉक और अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया, जो हत्या की ओर संकेत करता है। वहीं, अन्य तीन परिजनों का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित लंबे समय तक फरार रहा और उसे जनवरी 2017 में चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपित ने अदालत में दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 2017 से न्यायिक हिरासत में है। साथ ही, मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने की बात भी कही गई। राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला अत्यंत जघन्य है और अब तक आठ गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, जो आरोपित की संलिप्तता को प्रथम दृष्टया सिद्ध करते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है, जिसमें चार लोगों के लापता होने और एक की हत्या की पुष्टि हुई है। आरोपित का लंबे समय तक फरार रहना भी उसके आचरण को संदिग्ध बनाता है। कोर्ट ने माना कि ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है और इस चरण में जमानत देने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / लता