बलरामपुर : मनरेगा से बदली मंडपपारा की तस्वीर, कूप निर्माण से सिंचाई सुलभ, किसानों की आय बढ़ी
बलरामपुर, 30 अप्रैल (हि.स.)।बलरामपुर जिले के मंडपपारा में मनरेगा के तहत बने कूप ने ग्रामीणों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला दिया है। जहां कभी पानी के लिए जूझना पड़ता था, वहीं अब सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान विविध फसल लेकर आय बढ़ा रहे हैं। मुख्य
लाभार्थी।


बलरामपुर, 30 अप्रैल (हि.स.)।बलरामपुर जिले के मंडपपारा में मनरेगा के तहत बने कूप ने ग्रामीणों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला दिया है। जहां कभी पानी के लिए जूझना पड़ता था, वहीं अब सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान विविध फसल लेकर आय बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और सुशासन की दिशा में चल रहे प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। विकासखंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत रामनगरकला के मंडपपारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत निर्मित कूप ने ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

मंडपपारा, जो कभी पानी की कमी से जूझता था, आज उसी कूप के कारण आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर कम होने के कारण हर साल गर्मी के मौसम में सिंचाई की समस्या गंभीर हो जाती थी। किसान छोटे-छोटे अस्थायी जलस्रोतों पर निर्भर रहते थे, जिससे खेती सीमित रह जाती थी और आय भी प्रभावित होती थी।

स्थानीय निवासी सुमंत हालदार ने ग्राम सभा में कूप निर्माण का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। इसके बाद जनपद पंचायत बलरामपुर द्वारा तकनीकी परीक्षण कर करीब 2.98 लाख रुपये की लागत से कूप निर्माण का प्राक्कलन तैयार किया गया।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के तहत इस कार्य को मंजूरी मिली और निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया।

यह कूप अब लगभग 2.50 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का प्रमुख स्रोत बन गया है। इससे 8 किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है, जो अब केवल बारिश पर निर्भर नहीं हैं। सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों ने फसल विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कूप निर्माण के दौरान मनरेगा के तहत 492 मानव दिवस का सृजन भी हुआ, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिला और अतिरिक्त आय का स्रोत बना। इस पहल ने न केवल जल संकट का समाधान किया, बल्कि गांव में आर्थिक गतिविधियों को भी गति दी है।

कूप से लाभान्वित सुमंत हालदार बताते हैं कि पहले वे केवल धान की खेती तक सीमित थे, लेकिन अब मक्का और आलू जैसी फसलें भी ले रहे हैं। इन फसलों से उन्हें करीब 1 लाख 20 हजार रुपये की आय हुई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आया है।

हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय