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--हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, सीबीआई जांच पर विचार
प्रयागराज, 30 अप्रैल (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। ऐसा तब हुआ जब यह सामने आया कि जिस सामूहिक दुष्कर्म के आरोपित को पुलिस महीनों से फरार और अज्ञात स्थान पर बता रही है। वहीं आरोपित हाइकोर्ट की कार्यवाही में परोक्ष रूप से शामिल हो रहा था और हाल ही में हलफनामा दाखिल करने के लिए उसका आधिकारिक फोटोग्राफ भी न्यायालय परिसर में लिया पाया गया।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह स्थिति चौंकाने वाली है और प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी की निष्ठा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
मामला उस आपराधिक रिट याचिका से सम्बंधित है, जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस पांच महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपित याकूब को गिरफ्तार नहीं कर सकी और न ही जांच पूरी कर पाई। पूर्व सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने जांच में देरी पर असंतोष जताते हुए सम्बंधित क्षेत्राधिकारी और जांच अधिकारी को तलब किया था। हालांकि, जांच अधिकारी आरोपित को पकड़ने में विफल रहा और अपने अनुपालन हलफनामे में प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया था।
इस पर अदालत ने कहा, “वह हमें केवल यह कहानी सुना रहा है कि उसने कितने प्रयास किए पर सब व्यर्थ रहे। यह हलफनामा केवल समय लेने का प्रयास प्रतीत होता है। हमें नहीं पता कि यह समय आरोपित की मदद के लिए लिया जा रहा है या पुलिस की।”
सुनवाई के दौरान घटनाक्रम ने तब नया मोड़ लिया जब फरार बताए जा रहे आरोपित की ओर से एक अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ। कोर्ट ने जब आरोपित को पेश करने को कहा, तो उसके वकील ने जरूरी निर्देश लेने के लिए कोर्ट से समय मांगा।
इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपित अदालत के साथ खेल खेल रहा है और यह भी कहा कि आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि पुलिस उसकी मदद कर रही है या नहीं। अदालत तब और अधिक आश्चर्यचकित हुई जब यह पाया गया कि आरोपित की ओर से दाखिल संक्षिप्त जवाबी हलफनामे के साथ उसका फोटो संलग्न है, जिसे हाईकोर्ट के आधिकारिक कैमरे से सुनवाई से मात्र दो दिन पूर्व लिया गया था।
इस पर खंडपीठ ने कहा, “यह अत्यंत चौंकाने वाला है कि एक फरार आरोपित, जो हाईकोर्ट के इतने निकट घूम रहा है और लगभग इस याचिका की सुनवाई की प्रक्रिया में भाग ले रहा है, वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह जांच अधिकारी की निष्ठा के बारे में बहुत कुछ कहता है।”
हाईकोर्ट ने पुलिस को आरोपित को पकड़ने के लिए अंतिम 10 दिन का समय दिया है। साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए संकेत दिया कि जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 08 मई को होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे