ऊंचे टावर और हरियाली के खात्मे से घुटी ठाणे की सांसें , 4 डिग्री ज्यादा पारा
मुंबई, 30 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र के ठाणे शहर में बढ़ते तापमान, तेज़ी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल और घटती हरियाली के कारण शहर का तापमान 38 से 41 डिग्री के बीच पहुंच गया है। बिना प्लान के शहरीकरण की वजह से गर्मी दिन-ब-दिन तेज़ होती जा रही है। शहर म
City's bearth suffocated destruction tower and greenery


मुंबई, 30 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र के ठाणे शहर में बढ़ते तापमान, तेज़ी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल और घटती हरियाली के कारण शहर का तापमान 38 से 41 डिग्री के बीच पहुंच गया है। बिना प्लान के शहरीकरण की वजह से गर्मी दिन-ब-दिन तेज़ होती जा रही है।

शहर में बन रही ऊंची इमारतों, सीमेंट-डामर का बढ़ता जाल और खुली जगहों की कमी ने ठाणे की नेचुरल सांस को रोक दिया है। विशेषज्ञ का कहना है कि जो शहर कभी अपनी झीलों और हरियाली के लिए जाना जाता था, वह अब “अर्बन हीट आइलैंड” की समस्या से जूझ रहा है। हरियाली की कमी की वजह से शहर का तापमान आस-पास के इलाकों के मुकाबले 2 से 4 डिग्री ज़्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है। बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर भी असर डाल रहा है। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस की दिक्कतें बढ़ रही हैं। दोपहर में सड़कों पर घूमना मुश्किल हो गया है।

पर्यावरणविद डॉ प्रशांत सिनकर का कहना है कि ठाणे में बढ़ता तापमान और कंक्रीट के जंगल खराब अर्बन प्लानिंग का नतीजा है। पेड़ों की कटाई, झीलों पर कब्ज़ा और ग्रीन स्पेस की कमी की वजह से शहर “हीट आइलैंड” बनता जा रहा है। अगर पेड़ों का बचाव, पानी के सोर्स का बचाव और सस्टेनेबल प्लानिंग तुरंत लागू नहीं की गई, तो ठाणे झीलों के शहर के तौर पर अपनी पहचान खो देगा और गर्मी से झुलसने वाले शहर के तौर पर जाना जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा