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बरेली, 30 अप्रैल (हि.स.) । गुजरात स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के तत्वावधान में दिशा इंटर कॉलेज में भव्य सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में बनने वाले बहुउद्देशीय हॉल का शिलान्यास भी राज्यपाल द्वारा किया गया, जिससे संस्थान के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें छात्रों ने गरबा, डांडिया, शिव स्तोत्र पर नृत्य, स्वागत गीत और फैशन शो के माध्यम से गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। खास बात यह रही कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान व्यक्तित्वों की झलक प्रस्तुतियों में देखने को मिली। सामान्य विद्यार्थियों के साथ दिव्यांग बच्चों ने भी शानदार भागीदारी निभाई, जिसने पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बहुउद्देशीय भवन का शिलान्यास किया। यह भवन भविष्य में विद्यार्थियों के कौशल विकास, सेमिनार, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित होगा। शिलान्यास के बाद परिसर में ‘बापू बाजार’ का भी अवलोकन किया गया, जहां छात्रों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी।
कार्यक्रम में मूकबधिर छात्र मानव द्वारा तैयार किया गया राज्यपाल का स्केच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे उन्होंने भावुक होकर स्वीकार किया। राज्यपाल ने छात्र को पोषण पोटली भी प्रदान की और उसकी प्रतिभा की सराहना की।
केपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि राज्यपाल की प्रेरणा से इस विद्यालय को विश्वविद्यालय ने गोद लिया है और इसके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में तीन नई प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं तथा विज्ञान संकाय की शुरुआत भी की गई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में मात्र दो बच्चों से शुरू हुआ यह विद्यालय आज 450 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है। कुलपति ने यह भी बताया कि इसे केजी से पीजी स्तर तक विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण होने के बाद यहां बड़े शैक्षिक आयोजन संभव होंगे।
अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि छोटे स्तर से शुरू होकर आज यह विद्यालय एक वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री देने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने का कार्य है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील व्यक्ति ही विशेष बच्चों को सही दिशा दे सकता है।
उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को कम से कम पांच गांव गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी योजनाओं को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के बीच जाकर काम करना चाहिए।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में लाखों टीबी मरीजों को स्वस्थ किया गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों और राजभवन के सहयोग से मरीजों को गोद लेकर उनका उपचार और पोषण सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की बात कही और बताया कि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य जांच अभियानों के माध्यम से हजारों महिलाओं में समय रहते बीमारियों की पहचान कर इलाज किया गया है। उन्होंने 9 से 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए एचपीवी वैक्सीन के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करती है।
राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को सामान्य शिक्षा प्रणाली में ही शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे भी मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने बताया कि कई विश्वविद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष आरक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में जल्दबाजी में लिए गए निर्णय अक्सर भविष्य को प्रभावित करते हैं, इसलिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रस्तुत किया, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समावेश के संदेश को भी मजबूती से सामने रखा।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार