हुनर को सलाम : पारंपरिक शाल बुनाई की कला को जीवित रखे हुए हैं रामलाल
धर्मशाला, 03 अप्रैल (हि.स.)। वर्तमान दौर में जब अधिकतर युवा रोजगार के लिए एडवांस्ड तकनीक की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब खड्डी (हैंडलूम) जैसी पारम्परिक कलाओं को समझने और सीखने वाले लोगों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में प

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