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किशनगंज, 27 अप्रैल (हि.स.)। जिले के टेउसा पंचायत अंतर्गत सिमलबाड़ी स्थित जूट मिल की जमीन की खरीद-बिक्री में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच तेज कर दी है, वहीं इस मामले में भू-माफियाओं पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जूट मिल की जमीन को बिना आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए ही करोड़ों रुपये में बेचने का आरोप लगाया गया है। सोमवार को जिला परिषद सदस्य इंजीनियर नासिक नादिर ने कहा कि सिमलबाड़ी स्थित जूट मिल की पूरी जमीन को भू-माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से बेच दिया गया है।
उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यदि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन किया जाएगा। इधर, प्रमंडलीय आयुक्त पूर्णिया के निर्देश पर कराई गई स्थलीय जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि संबंधित जूट मिल वर्तमान में अस्तित्व में नहीं है और उसकी जमीन अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर खरीद-बिक्री कर दी गई है। राजस्व अभिलेखों में भी विभिन्न खातों में जमाबंदी दर्ज पाई गई है, जबकि कई मामलों में दाखिल-खारिज के आवेदन खारिज किए गए हैं। कुछ मामलों में करेक्शन स्लिप जनरेट होने से भी संदेह गहरा गया है।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि जूट मिल परिसर में सरकारी राशि से निर्मित भवन अब मौजूद नहीं हैं और केवल कुछ पिलर के अवशेष बचे हैं, जो संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं। जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि भूमि रैयती है और उसकी खरीद-बिक्री हुई है। हालांकि, यह जांच की जा रही है कि जमीन के लेन-देन में उद्योग विभाग से एनओसी लिया गया था या नहीं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है और इसमें शामिल लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। फिलहाल प्रशासन की सक्रियता से भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह