छह लघु कहानियों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियों में उभरी युवा कलाकारों की प्रतिभा
जम्मू 19 अप्रैल (हि.स.)। नटरंग द्वारा अपने साप्ताहिक ‘संडे थिएटर’ के अंतर्गत आज नटरंग स्टूडियो थिएटर में एक अनूठा नाट्य प्रयोग प्रस्तुत किया गया, जिसमें छह लघु कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन किया गया। इस नए प्रयोग में थिएटर के नए कलाकारों—निक्शय
The talent of young artists emerged in theatrical productions based on six short stories.


जम्मू 19 अप्रैल (हि.स.)। नटरंग द्वारा अपने साप्ताहिक ‘संडे थिएटर’ के अंतर्गत आज नटरंग स्टूडियो थिएटर में एक अनूठा नाट्य प्रयोग प्रस्तुत किया गया, जिसमें छह लघु कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन किया गया। इस नए प्रयोग में थिएटर के नए कलाकारों—निक्शय महाजन, अर्नव धोतरा, मोहित सिंह, विराट वर्मा और गौतम रत्तन—ने मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। निर्देशन नीरज कांत ने किया, जबकि संचालन सौजन्या शेखर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डाक घर से हुई, जिसे निक्शय महाजन ने प्रस्तुत किया। रवींद्रनाथ टैगोर की इस रचना में एक बालक की स्वतंत्रता और जीवन के प्रति जिज्ञासा को दर्शाया गया। इसके बाद गड्डा का मंचन अर्नव धोतरा ने किया, जिसमें आम आदमी की समस्याओं को उजागर किया गया।

मोहित सिंह ने कौवा और काला सांप के माध्यम से प्रकृति की कठोर सच्चाइयों को प्रस्तुत किया, जबकि विराट वर्मा ने अंधेर नगरी चौपट राजा का मंचन कर समाज में व्याप्त अव्यवस्था और अन्याय पर कटाक्ष किया। इसके बाद उपेन्द्र नाथ अश्क की रचना तौलिये को गौतम रत्तन ने प्रस्तुत किया, जिसमें दांपत्य जीवन की भावनात्मक जटिलताओं को दर्शाया गया। कार्यक्रम का समापन नया साल से हुआ, जिसे निक्शय महाजन ने प्रस्तुत किया। लू शुन की इस कहानी ने सामाजिक उपेक्षा और अकेलेपन की मार्मिक झलक पेश की।

इस अवसर पर नटरंग के निदेशक बलवंत ठाकुर ने कहा कि दर्शकों से जुड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम कहानी कहने की कला है और यह नया प्रयोग उसी दिशा में एक प्रयास है। युवा कलाकारों के उत्साह और निर्देशन की सशक्तता ने प्रत्येक प्रस्तुति को दर्शकों से गहराई से जोड़ा। कार्यक्रम ने एक बार फिर नटरंग के उस प्रयास को रेखांकित किया, जिसके माध्यम से वह नए प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच प्रदान कर सार्थक और प्रभावशाली रंगमंच को बढ़ावा दे रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा