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सुपौल, 19 अप्रैल (हि.स.)। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के आदेश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के सचिव मो. अफजल आलम के निर्देश पर रविवार को सदर प्रखंड के चकडुमिरया गांव (वार्ड संख्या 10), पंचायत पिपरा खुर्द में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए संस्था-पूर्व मध्यस्थता की प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अदालतों पर बढ़ते मामलों का बोझ कम करना, व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना और विवादों का त्वरित व सस्ता समाधान सुनिश्चित करना है।
जानकारी दी गई कि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 12A के तहत यदि किसी मामले में तत्काल अंतरिम राहत की मांग नहीं की जा रही है, तो अदालत में मुकदमा दायर करने से पहले मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। वर्ष 2018 के संशोधन के बाद तीन लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के वाणिज्यिक विवादों में सीधे अदालत जाने से पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समक्ष आवेदन करना आवश्यक होता है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि मध्यस्थता एक स्वैच्छिक और गोपनीय प्रक्रिया है, जिसमें एक निष्पक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचाने में सहायता करता है।
इस प्रक्रिया में समय और खर्च दोनों की बचत होती है तथा आपसी संबंध भी बने रहते हैं।साथ ही ग्रामीणों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 9 मई 2026 के बारे में भी जानकारी दी गई और अधिक से अधिक मामलों को लोक अदालत के माध्यम से सुलझाने की अपील की गई।
इस अवसर पर पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार, पाराविधिक स्वयंसेवक मो. निजाम, मो. मोजम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र