Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

कोलकाता, 15 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि वे हिंसा-प्रवण क्षेत्रों का दौरा कर 16 अप्रैल शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
आयोग के निर्देश के अनुसार, अधिकारियों को उन इलाकों और बूथों का विशेष रूप से निरीक्षण करना होगा जहां वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव, वर्ष 2023 के पंचायत चुनाव और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इसमें मतदान से पहले, मतदान के दौरान और मतदान के बाद हुई घटनाओं वाले क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर मोबाइल, सैटेलाइट और वायरलेस संचार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क स्थापित किया जा सके। जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी संयुक्त रूप से इन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और चुनाव से पहले संचार व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करेंगे।
आयोग ने मतदान कर्मियों के लिए दिशा-निर्देश दोहराते हुए निष्पक्षता पर जोर दिया है। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी किसी राजनीतिक प्रभाव, उपहार या लाभ को स्वीकार नहीं करेगा। मतदान से पहले मॉक पोल कराना अनिवार्य किया गया है और ईवीएम तथा वीवीपैट मशीनों की जांच भी जरूरी होगी। मतदान के दौरान किसी भी अनियमितता की जानकारी तुरंत आयोग के ऐप या मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को देनी होगी।
इसी बीच कोलकाता पुलिस ने भी सख्ती दिखाते हुए सभी थानों को लंबित गिरफ्तारी वारंट तत्काल निष्पादित करने का निर्देश दिया है। पुलिस को कहा गया है कि वारंट वाले आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए या फिर की गई कार्रवाई की जानकारी लालबाजार स्थित मुख्यालय को दी जाए। यह निर्देश जमानती और गैर-जमानती दोनों प्रकार के वारंट पर लागू होगा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को कराया जाएगा, जबकि मतगणना चार मई को होगी।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर